अब सिम कार्ड बेचने के लिए कराना होगा पुलिस वेरिफिकेशन, वरना 10 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, सरकार ने धोखाधड़ी से हासिल किए गए 52 लाख कनेक्शनों का पता लगाया और उन्हें निष्क्रिय कर दिया। नरेंद्र मोदी सरकार ने गुरुवार को सिम डीलरों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया और धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए थोक कनेक्शन भी बंद कर दिए। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक ब्रीफिंग में कहा कि अब, नए डीलरों (मोबाइल सिम कार्ड के) के लिए पुलिस सत्यापन और बायोमेट्रिक सत्यापन से गुजरना अनिवार्य होगा। अब सभी पॉइंट-ऑफ-सेल डीलरों के लिए भी पंजीकरण अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि संचार साथी पोर्टल के लॉन्च के बाद से, सरकार ने 52 लाख कनेक्शनों का पता लगाया और उन्हें निष्क्रिय कर दिया, जो धोखाधड़ी से प्राप्त किए गए थे। सरकार ने मोबाइल सिम कार्ड बेचने वाले 67,000 डीलरों को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि मई 2023 से 300 सिम कार्ड डीलरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पहले, लोग थोक में (मोबाइल) सिम कार्ड खरीदते थे। इसके लिए थोक में सिम कार्ड खरीदने का प्रावधान था। मंत्री ने कहा कि हालाँकि, इस प्रावधान को ख़त्म करने का निर्णय लिया गया है। इसके बजाय, हम एक उचित व्यावसायिक कनेक्शन प्रावधान लाएंगे जो धोखाधड़ी वाली कॉल को रोकने में मदद करेगा।
वैष्णव ने कहा कि 10 लाख सिम डीलर हैं और उन्हें पुलिस सत्यापन के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग ने बल्क कनेक्शन के प्रावधान को भी बंद कर दिया है और इसके स्थान पर बिजनेस कनेक्शन की एक नई अवधारणा पेश की जाएगी। वैष्णव ने कहा कि इसके अलावा, व्यवसायों की केवाईसी, सिम लेने वाले व्यक्ति की केवाईसी भी की जाएगी। इस साल मई में पंजाब पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी पहचान का उपयोग करके सक्रिय किए गए 1.8 लाख से अधिक सिम कार्डों को ब्लॉक कर दिया था और ऐसे सिम कार्ड जारी करने के लिए 17 लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

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