पेयजल योजनाओं में बह गए करोड़ों, हमीरपुर का किसान टैंकर से पानी सप्‍लाई कर बुझा रहा हजारों की प्‍यास

हमीरपुर/उत्तर प्रदेश। हमीरपुर जिले में ग्रामीण पेयजल योजनाएं रामभरोसे चल रही हैं। हालत यह है कि कई करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी ये पेयजल योजनाएं ग्रामीणों के लिए तमाशा बन गई हैं। आधा दर्जन से अधिक गांवों के लिए तीन दशक पहले बनाई गई एक ग्रामीण पेयजल योजना का संचालन ठप हो जाने से पूरे गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। अब गांव के ही एक किसान ने ग्रामीणों के लोगों को पीने का पानी मुहैया कराने के लिए पानी के टैंकर का इंतजाम किया है। टैंकर आते ही गांव के लोगों की भीड़ पानी भरने के लिए उमड़ पड़ती है।हमीरपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत को लेकर शुरू में जलनिगम ने ग्राम समूह पेयजल योजनाए तैयार की थी। तमाम गांवों के लिए एक-एक ग्राम समूह पेयजल योजनाएं बनाकर लोगों की प्यास बुझाने के इंतजाम किए गए थे लेकिन कुछ ही समय बाद ये पेयजल योजनाएं दम तोड़ गईं। ग्राम समूह पेयजल योजनाओं के लिए गांवों में अंडरग्राउंड पाइपलाइनें डाली गई थी जो जलापूर्ति होते ही जगह-जगह से फट गईं। घटिया पाइपलाइन डाले जाने के कारण ज्यादातर ग्राम समूह पेयजल योजनाएं फेल हुई हैं।
हमीरपुर जिले के मुस्करा क्षेत्र की पहाड़ी भिटारी ग्राम समूह पेयजल योजना एक बानगी है जिसमें शुरू से ही तमाम गांवों को पीने का पानी नहीं मिल सका। जलसंस्थान के अधिशाषी अभियंता राहुल सिंह ने बताया कि जलनिगम ने पहाड़ी भिटारी ग्राम समूह पेयजल योजना का निर्माण कराया था। बाद में संचालन कराने के लिए यह पेयजल योजना जलसंस्थान को दी गई थी।
उन्‍होंने बताया कि 2017 से ग्रामीण पेयजल योजनाओं के रखरखाव के लिए कोई भी बजट नहीं मिल रहा है। अब ग्रामीण पेयजल योजनाएं जल जीवन मिशन में शामिल कर दी गई हैं। कई दशक तक इस पेयजल योजना का संचालन जलसंस्थान करता रहा जिसके रखरखाव में कई करोड़ रुपये ठिकाने लग गए। इसके बावजूद पानी की किल्लत से ग्रामीणों को निजात आज तक नहीं मिल सकी।
तीस साल पहले पूर्व मंत्री ने जिला योजना से दी थी मंजूरी
पिछले तीस साल पहले बादशाह सिंह विधायक थे। तब उन्होंने मुस्करा क्षेत्र के अलरा गौरा, पहाड़ी भिटारी, गहरौली समेत तमाम गांवों के लिए ग्राम समूह पेयजल योजना को जिला योजना से मंजूरी कराई थी। जलनिगम ने उस समय इस पेयजल योजना को तीन किमी दूर अलरा गौरा गांव में स्थापित कराया था। इस पेयजल योजना से आधा दर्जन से अधिक गांवों को शामिल किया गया था। गांवों तक पाइपलाइनें भी डाली गईं थीं। पेयजल योजना में भी भारी बजट भी खर्च हो गया था फिर भी चयनित गांवों को पीने का पानी नहीं मिल सका। कई किमी लम्बी पाइपलाइनें भी फट गई थी।
करीब पच्चीस हजार आबादी को मिलना था पानी
जलसंस्थान के मुताबिक पहाड़ी भिटारी ग्राम समूह पेयजल योजना का निर्माण अलरा गौरा में तीन दशक पहले कराया गया था। यहां से तीन किमी दूर पहाड़ी भिटारी गांव बसा है। इस पेयजल योजना से गहरौली समेत आधा दर्जन गांवों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए अंडरग्राउंड पाइपलाइनें डाली गई थी। लेकिन दूर के गांवों तक पानी नहीं पहुंच सका। अभियंताओं का कहना है कि अलरा गौरा गांव के लोगों को पीने के पानी तो इस पेयजल योजना से मिलता रहा लेकिन गहरौली समेत अन्य तमाम गांवों की करीब पच्चीस हजार की आबादी को पानी नसीब नहीं हुआ।
अब एक किसान टैंकर के जरिए हजारों लोगों को दे रहा पीने का पानी
पहाड़ी भिटारी गांव के रवीन्द्र कुशवाहा, विमल कुशवाहा, रामदयाल राजपूत, राजेश सविता समेत तमाम लोगों ने बताया कि गांव के लोगों को इस पेयजल योजना से पीने का पानी नहीं मिल रहा है। अब गांव के अवधेश राजपूत ने अपने टैंकर से गांव के हर मुहल्ले में पीने का पानी लोगों को मुहैया करा रहे है। बताया कि सुबह से शाम तक पूरे गांव के लोगों की प्यास बुझाने को पानी का टैंकर गली कूचों में भेजा जा रहा है। लोग बड़े ही उत्साह से पानी भरते हैं। जलसंस्थान के अधिशाषी अभियंता राहुल सिंह ने बताया कि अब जल जीवन मिशन में ये पेयजल योजना सम्मिलित हो गई है।

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