नागपुर में गर्भवती महिला के लिए पुलिस ने तोड़ा राष्ट्रपति का सिक्युरिटी प्रोटोकॉल, बनाया इमरजेंसी कॉरिडोर

नागपुर पुलिस ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल में ढील दी और समय पर अस्पताल पहुंचाया। इससे मां और बच्चे दोनों सुरक्षित रहे।
नागपुर/महाराष्ट्र। नागपुर में पुलिसकर्मियों ने एक गर्भवती महिला और उसके बच्चे की जान बचाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल को भी तोड़ दिया। यह घटना नागपुर-वर्धा रोड पर उस समय हुई जब एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से जूझ रही थी और ट्रैफिक में फंस गई थी। बुधवार दोपहर करीब 12 बजकर 45 मिनट पर राष्ट्रपति का काफिला एम्स नागपुर राज्यपाल आवास की ओर लौट रहा था। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनज़र सड़क पर ‘जीरो-टॉलरेंस’ गाइडलाइंस लागू थीं। इसके कारण आम यातायात पूरी तरह रोक दिया गया था।
इसी बीच चिंचभवन चौक के पास एक कैब में सवार गर्भवती महिला को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला के साथ मौजूद दूसरी महिला ने तत्काल बेलतरोड़ी पुलिस स्टेशन की गश्त टीम से संपर्क किया और उन्हें इस बारे में अवगत करवाया। सूचना मिलते ही असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर पंकज काकडे, हेड कांस्टेबल प्रशांत थाओकर और कांस्टेबल अजय नेवारे ने बिना देर किए कार्रवाई शुरू की।
उन्होंने कंट्रोल रूम के साथ समन्वय स्थापित किया और मौके पर मौजूद लोगों की मदद से लगभग 80 से 100 वाहनों को किनारे कर एक इमरजेंसी कॉरिडोर तैयार किया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए एक पुलिसकर्मी बाइक पर आगे चला और कैब को रास्ता दिखाते हुए सीधे अस्पताल तक पहुंचाया। पुलिस की तत्परता और सूझबूझ के कारण महिला समय पर अस्पताल पहुंच सकी। इससे महिला और बच्चे की जान सुरक्षित रही।
बता दें कि वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक होने पर संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। यहां तक कि नौकरी जाने का भी खतरा रहता है। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया जिसकी हर कोई तारीफ कर रहा है।




