‘इस्लामाबाद को सोमनाथ बना देंगे’, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान की पार्टी ने गजनवी का नाम लेकर मुनीर-शहबाज को दी धमकी
पीटीआई संस्थापक और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान 2023 से जेल में बंद हैं। उनकी पार्टी पीटीआई ने उनकी रिहाई के मुद्दे पर इस्लामाबाद घेरने का ऐलान किया है।

इस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च और देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। इसी बीच इमरान खान की बहन अलीमा खान को लाहौर में पुलिस ने हिरासत में लेकर कोट लखपत जेल भेज दिया। यह कार्रवाई प्रस्तावित मार्च से कुछ दिन पहले हुई है।
पीटीआई का कहना है कि मार्च का उद्देश्य पार्टी संस्थापक इमरान खान की रिहाई और संवैधानिक अधिकारों की मांग को उठाना है। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनके खिलाफ कई मामले चल चुके हैं। इमरान खान और पीटीआई इन मामलों तथा मिली सजा को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं और आरोपों से इनकार करते हैं।
मार्च को लेकर सरकार और पीटीआई के बीच टकराव की स्थिति भी सामने आ रही है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने हाल में अपने विस्तृत आदेश में कहा है कि किसी राजनीतिक दल को सार्वजनिक सड़कों, राजमार्गों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा करने अथवा लोगों की आवाजाही बाधित करने का कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने प्रांतीय सरकारों को मार्च के लिए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल से रोकने के निर्देश भी दिए हैं।
पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने भी कहा है कि सरकार कानून के मुताबिक मार्च को नियंत्रित करेगी और किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी आयोजकों पर होगी। दूसरी ओर पीटीआई अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान ने कहा है कि पार्टी कानून नहीं तोड़ेगी और सड़कों को अवरुद्ध करने की योजना नहीं है।
इसी बीच अलीमा खान को लाहौर के अपर मॉल स्थित आवास से उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह जिम जाने के लिए निकली थीं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उन्हें सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी कानून के तहत हिरासत में लिया गया और बाद में कोट लखपत जेल भेज दिया गया। पीटीआई नेतृत्व ने उनकी हिरासत का विरोध किया है।
पीटीआई के खैबर पख्तूनख्वां अध्यक्ष जुनैद अकबर ने भी मार्च को लेकर सरकार को कड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। उनके एक वीडियो में सरकार की ओर से कथित ज्यादती की स्थिति में तीखी प्रतिक्रिया की बात कही गई है। हालांकि, ऐसे बयानों के बीच पीटीआई नेतृत्व के अन्य नेताओं ने सार्वजनिक रूप से विरोध प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने और कानून के दायरे में संचालित करने की बात कही है।
27 सितंबर के मार्च को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। सरकार ने प्रदर्शनकारियों को कानून के मुताबिक प्रदर्शन करने की बात कही है, जबकि पीटीआई अपने प्रस्तावित मार्च को जारी रखने पर कायम है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत तथा अदालत के निर्देशों के पालन को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है।




