बिना परमिट और फिटनेस के सड़कों पर दौड़ रहे ‘ग्रामीण सेवा ऑटो’

यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की है सांठगांठ!

पूर्वी दिल्ली। न परमिट, न फिटनेस, न बीमा, फिर भी ‘ग्रामीण सेवा’ ऑटो बेधड़क सड़कों पर दौड़ रहे हैं। सवारी बैठा रहे हैं। लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। यह हाल किसी पिछड़े इलाके का नहीं, देश की राजधानी दिल्ली का है। आश्चर्य तो यह जानकर होगा कि कई ‘ग्रामीण सेवा’ ऑटो एक दशक से अधिक समय से यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
न परिवहन विभाग और न ही यातायात पुलिस उनका कुछ बिगाड़ पाई है। यहां हर किसी के जेहन में सवाल उठ रहा होगा कि ऐसा कैसा हो रहा है। जवाब यह है कि इन दोनों विभागों से सांठगांठ किए बगैर कोई ऑटो सड़क पर दौड़ना तो दूर, उतर तक नहीं सकता।
खजूरी पुश्ता रोड, विवेक विहार, दिलशाद गार्डन, शास्त्री पार्क, दुर्गापुरी रोड, वजीराबाद रोड, खुरेजी, झील रोड पर ‘ग्रामीण सेवा’ ऑटो चलते हैं। ज्यादातर खटारा हालत में हैं। ऑटो के ढांचे से कई हिस्से गायब हो चुके हैं। हेडलाइट, टेल लाइट और डिपर खराब पड़े हैं। जागरण संवाददाता ने अलग-अलग लोकेशन पर जाकर ऐसे नौ ऑटो की पड़ताल की।
‘एमपरिवहन’ एप्प पर उनके नंबर डाल कर देखा तो पाया कि सभी बुराड़ी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में पंजीकृत हैं। सभी ऑटो अवैध रूप से दौड़ रहे हैं, उनके परमिट की अवधि खत्म हो चुकी है। किसी के पास वर्षों से बीमा नहीं है। फिटनेस और प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाण पत्र भी वर्षों पहले एक्सपायर हो चुका है।
खजूरी चौक पर सवारी बैठा रहे एक ‘ग्रामीण सेवा’ ऑटो के नंबर से रिकार्ड पता किया गया तो उसका परमिट मई 2016 और फिटनेट मई 2014 में एक्सपायर मिली। वर्ष 2012 से उसका बीमा नहीं हुआ है। दो साल से पीयूसी के बिना वह सड़क पर ऑटो दौड़ा रहा है।
इस चौक पर छह ऑटो चेक किए गए, सभी में यही कमियां मिलीं। दिलशाद गार्डन से बलदेव पार्क के बीच दौड़ रहे तीन ऑटो की पड़ताल की गई तो इनकी भी फिटनेस और परमिट अवधि खत्म पाई। विवेक और दुर्गापुरी चौक के पास भी इसी तरह से ऑटो गैर कानूनी रूप से दौड़ते नजर आए।
अधिवक्ता रक्षपाल सिंह के अनुसाार यातयात नियमावली के तहत सवारी वाले वाहनों के लिए परमिट और फिटनेस दोनों जरूरी होता है। फिटनेस से यह सुनिश्चित होता है कि वाहन में ढांचागत रूप से किसी तरह की कमी नहीं है। उसमें बैठने वालों को ढांचागत खामी की वजह से जान का खतरा नहीं है। परमिट से उसके लिए रूट तय होता है, साथ ही उसे देने की प्रक्रिया में यातायात संबंधी अन्य नियमों को पूरा कराया जा सकता है।

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