फतेहपुर के सरकारी स्कूल की शिक्षिका आसिया फारूकी को मिला राष्ट्रपति पुरस्कार

फतेहपुर,(उत्तर प्रदेश)। फतेहपुर जिले में एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका की जज्बे को लोग सलाम करते हैं। शिक्षिका अपनी लगन और मेहनत के दम पर प्राइवेट इंग्लिश मीडियम और कॉन्वेंट स्कूलों को मात ही नहीं दिया बल्कि, वहां दी जाने वाली शिक्षा और सुविधाएं अपने विद्यालय के बच्चों को दे रहीं हैं। खासकर सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा को लेकर अधिकांश लोगों में अपवाद रहा है। लेकिन यहाँ महिला शिक्षिका आसिया की मेहनत रंग लाई और आगामी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में इन्हें राष्ट्रपति सम्मान से नवाजा गया।
2008 में शिक्षिका की हुई थी तैनाती
नगर क्षेत्र के अस्ती प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका आशिया फारूकी की तैनाती बतौर प्रधानाध्यापक 2008 में हुई थी। उस समय स्कूल में करीब दर्जन भर बच्चे ही पढ़ रहे थे। आशिया फारूकी स्कूल में बच्चों को मौजूदा वक्त में हर वो सुविधा मुहैय्या कराती हैं, जिससे बच्चों का शिक्षा के साथ सामाजिक विकास हो सके।
वहीं डिजिटल के दौर को देखते हुए शिक्षिका टेक्नोलॉजी और एक्स्ट्रा ऐक्टविटी की क्लासेस को भी बढ़ावा देती है। वही प्राइवेट इंग्लिश स्कूलों की तर्ज़ पर अपने स्कूल में पढ़ाई से लेकर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अन्य ऐक्टिविटीज पर भी विशेष फोकस करती है।
डिजिटल एजुकेशन पर भी फोकस
स्कूल में ऑनलाइन क्लासेस के अलावा प्रोजेक्टर, डिजिटल लाइब्रेरी और डिजिटल माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा दी जाती है। जिससे उनकी मेहनत और जज्बे को देखकर जनपद वासियों में शिक्षिका आसिया फारुखी पर फख्र है।
राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए हुआ चयन
स्कूल में शिक्षा की बेहतरी को देखते हुए साल 2017 में प्रदेश के चुनिंदा स्कूलों में जिले से शिक्षिका आसिया फारूकी को सीएम योगी भी राज्य शिक्षा सम्मान से सम्मानित की कर चुके हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार 2023 के लिए जनपद से आसिया फारूकी का चयन हुआ है। जिन्हें आगामी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से नवाजा गया।
स्कूल में 200 बच्चों का है दाखिल
वहीं उनके विद्यालय के सहयोगी शिक्षकों का कहना है कि फारूकी मैडम हर रोज कुछ नया करने और कराने के लिए बच्चों को प्रेरित करती है। आशिया फारुखी ने अस्ती स्कूल की सूरत ही बदल दी है। स्कूल में जहां बच्चे नाम नहीं लिखाते थे, आज इंग्लिश मीडियम स्कूल के बच्चों का दाखिला हो रहा है।
इस स्कूल में आज शैक्षणिक माहौल और सारे भौतिक संसाधन मौजूद हैं। जिसके कारण विद्यालय में करीब 200 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है। शिक्षिका ने अपने प्रयास से यहां पर ढेर सारे संसाधन उपलब्ध कराए हैं। आशिया फारूकी का कहना है कि उन्हें बच्चों को बेहतर शिक्षा और संस्कार सिखाने में बढ़ा सकून मिलता है, अब तो जितना बड़ा सम्मान उतनी ज्यादा उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गईं।

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