जयपुर में बैठकर बनाए मृतकों और बच्चों के फर्जी जॉब कार्ड, सामने आया 4 करोड़ के मनरेगा घोटाले का सच

नूंह/हरियाणा। जरूरतमंद परिवारों को 100 दिन की रोजगार की गारंटी को लेकर शुरू हुई मनरेगा योजना नूंह जिले किस तरह से भ्रष्टाचार की भेट चढ़ी है, इसका अंदाजा आए दिन हो रहे नए–नए घोटाले के उजागर होने से लगा सकते है। इसी कड़ी में नूंह जिले की ग्राम पंचायत चीला में हुए करोड़ों रुपये के मनरेगा घोटाले में गिरफ्तार पूर्व महिला सरपंच के जेठ खालिद ने पुलिस रिमांड के दौरान कई राज उगले हैं। खालिद ने माना कि पंचायत विभाग के तीन अधिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने घोटाले को अंजाम दिया। मृतकों व बच्चों के फर्जी जोब कार्ड उन्होंने जयपुर स्थित एक किराए के मकान में बनाए थे।
बीते बृहस्पतिवार को अपराध जांच शाखा तावडू पुलिस ने मनरेगा घोटाले में आरोपी चीला गांव की पूर्व महिला सरपंच फिरदोज के जेठ खालिद को पढ़ेनी से उठाया था। आरोपी को न्यायालय में पेश कर दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। जहां घंटों पूछताछ के बाद आरोपी खालिद ने कई राज खोले। बताया कि करोड़ों रुपये के इस घोटाले में पंचायत विभाग का एबीपीओ जावेद अली, एबीपीओ अरशद सहित अकाउंटेंट असलम ने भी धोखाधड़ी व षड्यंत्र रचकर उनका साथ दिया। जिसमें उन्हीं के परिवार व गांव के कुछ नाबालिग बच्चों की उम्र बदलकर तथा कुछ मृत व्यक्तियों के फर्जी जोब कार्ड बनाए गए। विभिन्न बैंकों में फर्जी खाते खुलवाकर अलग-अलग किस्तों में करोड़ों रुपए की राशि डकार ली गई।
ग्रामीण अकरम की शिकायत पर हुई जांच
नूंह जिले के गांव चीला के ग्रामीण अकरम की शिकायत पर पुलिस ने कुछ दिन पूर्व मामला दर्ज किया था। जिसमें करीब 38 जोब कार्ड फर्जी पाए गए। गबन के आरोप में चीला गांव की पूर्व महिला सरपंच फिरदौज, पति ताहिर,जेठ खालिद, ससुर शहीद सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। यहां यह भी बता दें की जरूरतमंद परिवारों को 100 दिन की रोजगार की गारंटी को लेकर मनरेगा योजना की शुरुआत की गई थी ताकि साल में 100 दिन काम मिल सके। लेकिन इस योजना में सबसे अधिक घोटाला किया गया। बीजेपी विधायक कुंवर संजय सिंह का खालिद से मिलने को लेकर काफी चर्चा हुई। लोगों का कहना था कि घोटाले के आरोपित से विधायक का मिलन समझ से परे है। विधायक शनिवार दोपहर बाद मनरेगा गबन के आरोपित खालिद हुसैन से थाना तावड़ू मिलने पहुंचे थे।

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