नोएडा में सात दिन तक नाबालिग को हिरासत में रखकर किया टाॅर्चर, विरोध करने पर मां पर बरसाए थप्पड़
पुलिस पर मां को पीटने और पैसे छीनने का आरोप, किशोर न्याय बोर्ड ने जांच करने के आदेश दिए

नोएडा। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि किसी नाबालिग को जेल में या पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता है, लेकिन गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस ने घर में हुई चोरी के मामले में नाबालिग को सात दिन हिरासत में लेकर थाने, चौकी में रखा । महोबा व ग्वालियर तक दबिश दी। नाबालिग ने पुलिस के बेल्ट से पीटने की यातना को बयां किया है। जिसने भी बच्चे की बेबसी को सुना उसके मन में पुलिस के प्रति गुस्सा दिखा…मन में रस्सी का सांप बनाने वाली पुलिस की तस्वीर सी बन आई।
नाबालिग का कहना है कि नोएडा सेक्टर-126 पुलिस ने आठ अगस्त की शाम करीब पांच बजे पकड़कर देर रात तक थाने में रखा था। रात दो बजे पुलिस थाने से रायपुर गांव स्थित घर ले गई। उसकी मां के बेकसूर बताने पर पुलिस ने बेटे को चोर बताया। उसकी मां को भी थप्पड़ मारे। उसकी मां से छह हजार रुपये छीन लिए। थाने लाने के बाद पुलिस नाबालिग को महोबा उसके गांव लेकर गई।
एक होटल में रखने के बाद अगले दिन इधर-उधर घुमाने के बाद विशाल नाम के युवक को पकड़ा। उसके बाद वहां से पुलिस दोनों को ग्वालियर लेकर गई। नोएडा लौटने पर दो दिन चौकी पर रखा था। एक दरोगा ने बेल्ट से तलवे, हथेली व कलाई पर मारा। दर्द बर्दाश्त नहीं करने पर काफी देर तक चिल्लाता रहा था। पुलिस से बोला था कि मत मारो, लेकिन पुलिसकर्मी का दिल नहीं पसीजा था। पुलिस ने 15 अगस्त की शाम को कोर्ट के बाद संप्रेक्षण गृह पहुंचा था।
किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट ने नोएडा पुलिस से मामले के जांच अधिकारी उपनिरीक्षक योगेश चौधरी के खिलाफ जांच करने के आदेश दिए हैं। किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन करने को लेकर जबाव मांगा है। आठ अगस्त से 15 अगस्त क सेक्टर 126 थाने के लाकअप व परिसर का सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। किशोरी के बयान दर्ज कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। नोएडा के रायपुर गांव में रहने वाले अनवान खान के घर से 26 जुलाई को रात को चोरी हुई थी। चोर दो मोबाइल फोन, दो साेने की अंगूठी, 8500 रुपये नकदी व तीसरे मोबाइल का सिम ले गए थे।
डीसीपी नोएडा यमुना प्रसाद ने बताया कि चोरी के मामले में सेक्टर 126 थाना पुलिस टीम ने 14 अगस्त की रात नाबालिग को पकड़ा था। उसे न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया गया था। सभी आरोप निराधार हैं।




