एसपीजी को नहीं मिली राहत, बख्तरबंद गाड़ियां 10 साल पूरे होने पर एनसीआर से होंगी बाहर

नई दिल्ली। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) की अपनी तीन खास बख्तरबंद गाड़ियों(एसएवी) से जुड़ी मांग नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने ठुकरा दी। सशस्त्र बल की इस टुकड़ी ने अपनी इन डीजल गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की अवधि पांच साल के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया, जिनके 10 साल इसी दिसंबर में पूरे हो रहे हैं।
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की बेंच ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि बेशक ये खास बख्तरबंद गाड़ियां हैं और पिछले 10 सालों में चली भी बहुत कम हैं। इन गाड़ियों की जरूरत प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए पड़ती है। पर सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश के आलोक में अर्जी में किया गया अनुरोध मंजूर नहीं किया जा सकता। एसपीजी ने अपनी मांग के समर्थन में मोटर वीकल एक्ट में संशोधन से जुड़ी कुछ हालिया अधिसूचनाओं को एनजीटी के सामने रखा। उन पर गौर करते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि एसपीजी इन अधिसूचनाओं का लाभ नहीं ले सकती। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का 16 जनवरी, 2023 का नोटिफिकेशन सामान्य प्रकृति का है, जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश खासतौर पर एनसीआर से जुड़ा है।
ट्रिब्यूनल ने दोहराया कि एसपीजी की इन तीन डीजल से चलने वाली बख्तरबंद गाड़ियों के 10 साल दिसंबर में पूरे हो रहे हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के 29 अक्टूबर 2018 के आदेश के मुताबिक, ऐसी गाड़ियों के 10 साल पूरे होने पर उन्हें दिल्ली-एनसीआर में चलने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। एनजीटी को दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के आदेश में कोई खामी नजर नहीं आई, जिसे चुनौती देते हुए मौजूदा आवेदन दायर किया गया। एसपीजी ने अपने आवेदन में कहा कि ये गाड़ियां एसपीजी टेक्निकल लॉजिस्टिक्स का अभिन्न और बेहद जरूरी हिस्सा है। इन्हें 2013-14 में खरीदा गया था।

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