डिटेक्टिव एजेंसी की आड़ में मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकालकर बेचने वाला गिरफ्तार

नई दिल्ली। पुलिस अफसरों के मुताबिक, जानकारी मिली कि कुछ लोग डिटेक्टिव एजेंसी की आड़ में आम पब्लिक के मोबाइल की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) गैरकानूनी तरीके से निकालकर खरीद फरोख्त का काम कर रहे हैं। एएटीएस (एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वाड) टीम ने जांच शुरू की। इस बीच इनफॉर्मर ने रविवार 7 अगस्त को बताया कि एक मोबाइल फोन की सीडीआर मंगवाने के लिए पवन कुमार नाम के शख्स से बात हुई है। वो नोएडा की एक डिटेक्टिव एजेंसी में काम करता है। सीडीआर उपलब्ध करवाने के 25 हजार रुपये लेता है। यह भी बताया कि उस शख्स ने उसे सीडीआर देने के लिए एक ईमेल पासवर्ड देने को कहा है। सीडीआर निकलवाने के पैसे लेने के बाद उसकी नोएडा स्थित डिटेक्टिव एजेंसी के लोग उस ईमेल के ड्राफ्ट में अपलोड कर देंगे। उसके बाद वह सीडीआर को पेन ड्राइव में डाउनलोड करके दे देगा।इस काम को सिरे से अंजाम तक पहुंचाने के लिए पुलिस टीम ने उस इनफॉर्मर को एक ईमेल आईडी बनाकर दे दी। सोमवार 8 अगस्त को सुबह दस बजे पुलिस टीम को जानकारी मिली कि सीडीआर मंगवाने की डील पक्की हो चुकी है। 25 हजार लेगा। वह दोपहर को रोहिणी सेक्टर 18 में आने वाला है। आला अफसरों ने पुलिस टीम से एक को सीडीआर डील करने के लिए नकली ग्राहक बनाया। इंस्पेक्टर संदीप यादव की टीम तय समय पर सादे कपड़ों में पहुंच गई। एक हेड कॉन्स्टेबल को कस्टमर बनाकर डील के लिए खड़ा किया। साथ ही सरकारी खजाने से लिए हुए 500- 500 के 50 नोट, जिन पर पहचान का मार्क लगाकर जेब में रखे थे। जबकि टीम के बाकी मेंबर आसपास राउंड लेते रहे।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, करीब 12 बजे वह शख्स बाइक से पवन नाम का शख्स पहुंचा। पुलिसकर्मी ग्राहक बनकर मिला। पवन से जो डील हुई थी, वह 25 हजार रकम थमा दी। फिर उस पवन को लैपटॉप दिया। उसने अपनी जेब से 64 GB की पेन ड्राइव निकाल कर लैपटॉप में लगाई। इनफॉर्मर को पहले से दी गई ईमेल आईडी पवन ने ओपन कर दी। उसके ड्राफ्ट मेसेज में से एक सीडीआर पेन ड्राइव में सेव की और वह पेन ड्राइव ग्राहक बने पुलिसकर्मी को दे दी। पेन ड्राइव मिलते ही पुलिस टीम ने पवन को काबू कर लिया। पुलिस ने पेन ड्राइव को खोलकर चेक किया। जिसमें मोबाइल फोन कीसीडीआर एक्सल शीट के फॉर्मेट में मिली। पुलिस ने बरामद सीडीआर के बारे में पूछताछ की। उसने बताया कि वह यह सीडीआर अपनी नोएडा स्थित डिटेक्टिव एजेंसी कंपनी के माध्यम से मंगवाता है।पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में पवन ने यह भी बताया कि उसकी डिटेक्टिव कंपनी अन्य की तरह सीडीआर, बैंक स्टेटमेंट, इनकम टैक्स रिटर्न, जीएसटी रिटर्न, मोबाइल लोकेशन और उसकी ओनरशिप निकाल कर क्लाइंट की जरूरत के हिसाब से उपलब्ध कराती है।
सूत्रों के मुताबिक, पवन ने कहा कि उसकी कंपनी ग्राहक से एक ईमेल पासवर्ड लेती है। फिर सीडीआर को दी गई उस ईमेल के ड्राफ्ट में अपलोड कर देते हैं। इस के बाद वह सीडीआर के एवज में पैसे लेने के बाद डाउनलोड करके अपने क्लाइंट को दे देते हैं। पुलिस टीम ने तलाशी लेकर पवन की जेब से मार्क किए हुए नोट भी बरामद कर लिए। पुलिस का कहना है, पवन जिस डिटेक्टिव कंपनी में काम करता है। वह कंपनी गैरकानूनी तरीके से मोबाइल फोन की सीडीआर निकालती है।
खुलासे के बाद इन सवालों के कौन देगा जवाब?
- पवन जासूस कंपनी का मोहरा, आखिर उसे सीडीआर किसने दी?
- पवन के कबूलनामे पर क्या जासूस एजेंसी के खिलाफ एक्शन?
- कर्मचारी के हाथों किसने निकालकर भिजवाई सीडीआर?
- जासूसी कंपनी के पास किस स्रोत के जरिए डिटेल पहुंची?
- सीडीआर निकालने के और कितने मास्टरमाइंड?



