झारखंड के खपड़ी बाबा करते कुत्तों के काटने का अनोखा इलाज, मिट्टी के बर्तन में बैठकर घूमते हैं पीड़ित

साहेबगंज,(झारखंड)। सामने चबूतरे पर बैठे खपड़ी बाबा। हाथ में मिट्टी का ढक्कन लेकर कुछ लिख रहे हैं। उनके आस-पास रेबीज पीड़ितों की भीड़ लगी हुई है। बाबा मिट्टी के बर्तन पर कुछ लिखते हैं। उसके बाद कुछ मंत्र पढ़ते हैं। फिर वो बर्तन पीड़ित को दे दिया जाता है। पीड़ित उस छोटे से ढक्कन में अपने दोनों पैर रखता है। उसके बाद उसी पर बैठ जाता है। मिट्टी का वो ढक्कन पीड़ित के वजन से टूटता नहीं है। उसके बाद वो अपने हाथों के सहारे गोल-गोल तब तक घूमता है। जब तक बाबा उसे रोकने के लिए नहीं कह दें। जी हां, ये नजारा है झारखंड के साहेबगंज जिले का। जहां बाबा रेबीज का इलाज मिट्टी के बर्तन पर इंसान को घुमाकर करने का दावा करते हैं।
कुत्ते के काटने का अनोखा इलाज
बाबा बताते हैं कि कुत्ते के काटने के बाद उनके यहां ये परंपरागत इलाज उनके दादा के जमाने से चली आ रही है। उनका कहना है कि वो जड़ी-बूटी और मिट्टी के बर्तन पर लोगों को घुमाकर कई बीमारी का इलाज करते हैं। रेबीज उनमें प्रमुख है। बाबा का ये भी कहना है कि उसके बदले उन्हें मात्र 50 रुपये मिलते हैं। रेबीज के एक इंजेक्शन की कीमत 600 रुपये है। यहां पर वर्षों से कुत्ते के काटने का इलाज इसी तरह किया जाता है।
बाबा का बड़ा दावा
बाबा का दावा है कि मिट्टी के बर्तन का वजन महज 100 ग्राम होता है। अगर उस पर 100 किलो के वजन का पीड़ित बैठता है। उसे यदि कुत्ते ने काटा है तो मिट्टी का बर्तन नहीं टूटता है। यदि पीड़ित के अंदर कुत्ते का विष है और जैसे ही मिट्टी के बर्तन पर पैर रखता है वो टूट जाता है। यहां रोजाना दर्जनों लोग मिट्टी के बर्तन पर घूमते हुए मिल जाएंगे। बाबा का दावा है कि उनकी जड़ी-बूटी से कितने ही लोग ठीक हुई है। बर्तन वाले बाबा के पास पीड़ितों की लाइन लगी होती है। बाबा का ये भी दावा है कि जब तक विष नहीं उतरता तब तक मिट्टी का बर्तन नहीं फटता है। जब मिट्टी का बर्तन फूट जाता है तब पीड़ित को रेबीज मुक्त करार दे दिया जाता है।
घंटों मिट्टी के बर्तन पर घूमते लोग
इस इलाज के दौरान कई लोग घंटों मिट्टी के बर्तन पर घुमते हैं। उन्हें घंटों लग जाते हैं। उनका बर्तन नहीं टूटता है। मिट्टी के ढक्कन में दोनों पैर रखकर हजारों बार घूमना पड़ता है। उसके बाद भी वो नहीं टूटता। बाबा का दावा है कि उनके पास दूर दराज से लोग ठीक होने के लिए आते हैं। अब इसे आस्था कहें या अंधविश्वास लेकिन लोग बाबा के इलाज से ठीक हो जाते हैं। उन्हें पचास रुपये देते हैं। बाबा पूरे झारखंड में चाक वाले बाबा के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। यहां लोगों का लगातार आना-जाना लगा रहता है।

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