मेरठ में एंटी करप्शन टीम ने 4 लाख की रिश्वत लेते इंस्पेक्टर को किया गिरफ्तार

एंटी करप्शन टीम को हड़काने की करता रहा कोशिश, मीडिया के कैमरे के सामने मुंह छिपाता आया नजर

मेरठ/उत्तर प्रदेश। मेरठ में एंटी करप्शन टीम ने 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए हापुड़ में तैनात क्राइम ब्रांच के एक इंस्पेक्टर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह वही इंस्पेक्टर है, जो गिरफ्तारी के बाद भी वर्दी का रौब दिखाता रहा। एंटी करप्शन टीम को हड़काने की कोशिश करता रहा। बाद में मीडिया के कैमरे के सामने मुंह छिपाता नजर आया। आरोपी बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप में भी फर्जी आरोपी खड़ा कर यूपी पुलिस की इमेज पर दाग लगा चुका है।
आरोपी इंस्पेक्टर का नाम महेंद्र कुमार है, जो वर्तमान में हापुड़ क्राइम ब्रांच में तैनात था। गिरफ्तारी के बाद उसे तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। एंटी करप्शन टीम ने उसे मेरठ के कंकरखेड़ा थाने पहुंचाया, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इंटरनल चल-अचल संपत्ति आदि की भी जांच भी शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
मामला बागपत जिले के खेकड़ा थाना क्षेत्र के एक हत्या केस से जुड़ा है। गोठरा गांव के तीन लोगों दारा सिंह, मनोज और अजय पाल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज था। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे सबूत मिले, जिससे यह साफ होने लगा कि तीनों निर्दोष हैं। शिकायतकर्ता ने केस कमजोर पड़ता देख दबाव बनाया और मामला हापुड़ क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर करा दिया। यहीं से इंस्पेक्टर महेंद्र कुमार की भूमिका शुरू होती है।
जांच के नाम पर इंस्पेक्टर ने आरोपियों और उनके परिजनों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। 82 की कार्रवाई, कुर्की की धमकी और नोटिस चस्पा कराकर डर का माहौल बनाया गया। आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे लोकेश के मुताबिक, पिछले चार साल में वह करीब ढाई लाख रुपये पहले ही दे चुका था। इसके बावजूद इंस्पेक्टर की मांगें खत्म नहीं हुईं।
जब केस की धाराएं बदलीं और मामला हल्का हुआ, तो इंस्पेक्टर ने दो नाम केस से निकालने का भरोसा दिया। इसके बदले 4 लाख रुपये की नई डील तय की गई। लगातार दबाव और धमकियों से परेशान होकर लोकेश ने एंटी करप्शन विभाग का दरवाजा खटखटाया।
शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई गई। रोहटा रोड स्थित संगम टावर के पास मुलाकात का समय तय हुआ। लोकेश जूते के डिब्बे में 4 लाख रुपये लेकर इंस्पेक्टर की गाड़ी में बैठा। नोटों पर केमिकल लगाया गया था। गाड़ी के भीतर पूरी बातचीत और लेन-देन रिकॉर्ड हो रहा था। जैसे ही रुपये दिए गए, एंटी करप्शन टीम ने तुरंत दबिश देकर इंस्पेक्टर को पकड़ लिया। नोट गिनने से मना करना भी उसे नहीं बचा सका।
बुलंदशहर गैंगरेप केस में भी किया था फर्जीवाड़ा
महेंद्र कुमार का नाम पहले भी विवादों से जुड़ चुका है। 2016 में बुलंदशहर के एक हाईवे गैंगरेप केस में उसने दो बेगुनाह युवकों को आरोपी बताकर डीजीपी के सामने पेश किया था। बाद में सीबीआई जांच में सच्चाई सामने आई और दोनों युवक बरी हुए। गैंगरेप मामले में भी पुलिस की भारी फजीहत हुई थी।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button