24000 साल बाद जिंदा हुआ रहस्यमयी जीव: साइबेरिया की बर्फ में जमा था, वैज्ञानिकों ने फूंकी जान

वैज्ञानिकों ने 24000 साल से बर्फ में जमे एक रोटिफर को फिर से जिंदा कर इतिहास रच दिया है। यह जीव साइबेरिया के पर्माफ्रॉस्ट में जमीन की काफी गहराई में फंसा हुआ था। इस जीव ने जिंदा होने के बाद खुद की संख्या बढ़ानी भी शुरू कर दी है। इसे विज्ञान के क्षेत्र में चमत्कारिक घटना माना जा रहा है।

लंदन/एजेंसी। वैज्ञानिकों ने 24000 पुराने एक प्रागैतिहासिक जीव को फिर से जीवित करने में सफलता पाई है। उन्होंने बताया है कि यह बहुत छोटा जीव आर्कटिक क्षेत्र की पर्माफ्रॉस्ट (हमेशा जमी रहने वाली बर्फीली जमीन) में लगभग 24000 सालों से फंसा हुआ था। इस जीव को ‘बडेलॉइड रोटिफर ‘ कहा जाता है। इस वैज्ञानिक उपलब्धि ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस उपलब्धि ने अस्तित्व, समय और यहां तक कि जैविक सीमाओं के बारे में कई सवाल खड़े किए हैं।
बडेलॉइड रोटिफर जीव को साइबेरिया की बर्फीली जमीन के नीचे दबा हुआ पाया गया था। इसके बाज इसे प्रयोगशाला में इसे फिर से जीवित किया गया। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि यह जीव न सिर्फ जीवित रहा, बल्कि इसने अपनी संख्या बढ़ाना भी शुरू कर दिया। इस जीव के बारे में स्टडी को ‘करंट बायोलॉजी’ नाम की साइंस मैगजीन में प्रकाशित किया गया है। “24,000 साल पुरानी आर्कटिक पर्माफ्रॉस्ट से मिला एक जीवित बडेलॉइड रोटिफर” शीर्षक के प्रकाशित इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह जीव हजारों सालों तक बर्फ में जमे रहने के बाद सफलतापूर्वक फिर से जीवित हुआ और इसने प्रजनन भी किया है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि बडेलॉइड रोटिफर की खोज उत्तर-पूर्वी साइबेरिया से लाए गए पर्माफ्रॉस्ट के नमूनों में हुई। वैज्ञानिकों ने जमीन में काफी गहराई तक छेद किए, जहां की मिट्टी कई शताब्दियों से जमी हुई थी। मिट्टी की उम्र का पता लगाने के लिए ‘रेडियोकार्बन डेटिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया और अनुमान लगाया गया कि यह लगभग 24,000 साल पुरानी है। बडेलॉइड रोटिफर बहुत छोटे (सूक्ष्म) जीव होते हैं जो आमतौर पर ताजे पानी में पाए जाते हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि बडेलॉइड रोटिफर ‘क्रिप्टोबॉयोसिस’ की प्रक्रिया के कारण जिंदा रहा। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी जीव का मेटाबॉलिज्म लगभग पूरी तरह से रुक जाता है, जिससे वह बेहद कठोर वातावरण में भी जीवित रह पाता है—जैसे कि बहुत कम तापमान, पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और यहां तक कि ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में भी। यह जीव हजारों सालों तक जीवित कैसे रह पाया, इसका राज इसी प्रक्रिया में छिपा है।

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