गर्भवती महिला का गर्भाशय फटा, मुंबई के डॉक्टरों ने सर्जरी से बचाई जान

मुंबई/एजेंसी। सायन अस्पताल में स्त्री रोग व प्रसूति विभाग के डॉक्टरों ने न केवल गर्भवती महिला की जान बचाई, बल्कि उसके फटे हुए गर्भाशय को भी सुरक्षित रखने में सफलता पाई। डॉक्टरों के अनुसार, साइलेंट यूटरन रप्‍चर एक दुर्लभ स्थिति है। इसमें कुशलता पूर्व सर्जरी की जाती है। हमारी टीम ने सर्जरी कर महिला के यूटरस को बचा लिया है। मुंबई के सायन अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, गोवंडी निवासी 30 वर्षीय महिला को 38.2 सप्ताह का गर्भ था। उसकी 4 साल पहले भी सिजेरियन डिलिवरी हुई थी। महिला को पेट में हल्का दर्द हो रहा था, जिसके बाद उसकी सोनोग्राफी की गई। जांच में पता चला कि गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई है। इसके बाद उसे सायन अस्पताल में लाया गया।
स्त्री रोग विभाग के यूनिट हेड डॉ. निरंजन चवान ने बताया कि आमतौर पर जब यूटरस फट जाता है, तो मरीज को रक्तस्राव होने के साथ ही बेहोशी और असहनीय दर्द होने लगता है। इस केस में महिला को साइलेंट यूटरन रप्‍चर हुआ था। अस्पताल में जांच की गई. तो पता चला कि यूटरस फट जाने से उसके गर्भ में पल रहा भ्रूण पेट में आ गया था। हमने सर्जरी करके भ्रूण को बाहर निकाला और पेट में 500 सीसी अंदर तक हुए रक्तस्राव को भी साफ किया। महिला के यूटरस को बचाने के लिए हमने फटे हुए यूटरस को टांके लगाए। महिला भविष्य में दोबारा मां बन सकती है। इस केस स्टडी को इंटरनैशनल जर्नल ऑफ मेडिकल साइंस ऐंड करंट रिसर्च में भी प्रकाशित किया गया है।
प्रसव के दौरान शिशु के मां की जन्‍म नलिका की ओर जाने पर दबाव बनना शुरू होता है। इस दबाव के कारण मां का गर्भाशय छिल सकता है। अक्‍सर जिस जगह पर पहले का सिजेरियन स्‍कार होता है, वहीं से छिलता है। यूटरन रप्‍चर होने पर बच्‍चे के साथ-साथ गर्भाशय की चीजें भी पेट में आ जाती हैं।

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