दिल्ली में आधुनिक तकनीक से होगी यमुना की सफाई, 1400 करोड़ रुपये की लागत से चमकेगी नदी

नई दिल्ली। दिल्ली के आठ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के उन्नयन और क्षमता विस्तार से यमुना की सफाई में मदद मिलेगी। इन एसटीपी से उपचारित पानी की बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 10 मिलीग्राम प्रति लीटर होगी। कई अनधिकृत कॉलोनियों और गांवों में सीवर लाइनों की कमी भी नदी के प्रदूषण में योगदान दे रही है।
इन इलाकों में सीवर लाइन बिछाने का काम तेज किया जा रहा है। यमुना के प्रदूषण का एक बड़ा कारण इसमें गिरने वाला सीवेज है। सीवेज ट्रीटमेंट के लिए 37 एसटीपी हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर अपनी क्षमता और मानकों के मुताबिक काम नहीं करते। उन्नयन का काम चल रहा है। एनजीटी के आदेश के बाद 2015 में 18 एसटीपी के उन्नयन का प्रस्ताव तैयार किया गया था।
यह काम दिसंबर 2017 तक पूरा होना था, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ है। रिठाला फेज-2, पप्पनकलां और निलोठी कउन्नयन किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को आठ अन्य एसटीपी का उद्घाटन किया। ओखला फेज-5, घिटोरनी, वसंत कुंज, यमुना विहार फेज-1, केशवपुर फेज-1 और यमुना विहार फेज-3 एसटीपी के उन्नयन कार्य को अगले साल दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए सभी नालों का पानी एसटीपी में लाकर साफ किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक नाले का ड्रोन सर्वेक्षण किया गया है। इस कार्य के लिए दिल्ली को केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मिल रही है।
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि पहले एसटीपी 30 मिलीग्राम प्रति लीटर बीओडी के मानक पर बनाए जाते थे। अब सभी 10 मिलीग्राम प्रति लीटर बीओडी के मानक पर बनाए जा रहे हैं। सभी पुराने एसटीपी को भी इसी मानक के अनुसार उन्नत किया जा रहा है।




