गाजीपुर थाने के एसएचओ ने छात्रों को बांटे उल्टे तिरंगे, डीसीपी ने भी शेयर कर दी पोस्ट

थाने में भी लगे उल्टे तिरंगे, डीसीपी को डिलीट करनी पड़ी पोस्ट

दिल्ली ब्यूरो। डेरी वालों से मंथली लेने के आरोप झेल चुकी ईस्ट दिल्ली की गाजीपुर पुलिस एक बार फिर विवादों में है। इस बार का विवाद बेहद हैरान करने वाला है। दरअसल गाजीपुर थाने के एसएचओ और डीसीपी ईस्ट को शायद यह भी नहीं पता कि भारत यानी हमारे देश का झंडा कैसा है। ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि दोनों अधिकारियों ने खुद जगजाहिर किया है। 15 अगस्त को लेकर हुए कार्यक्रम के दौरान एसएचओ ने स्कूली छात्रों को उल्टे तिरंगे बांट दिए। इसके बाद डीसीपी ईस्ट ने अपने अकाउंट से इन फोटो को सोशल मीडिया पर पोस्ट भी कर दिया। लेकिन पोस्ट करने के बाद किरकिरी हुई तो डीसीपी को यह पोस्ट डिलीट करनी पड़ी।
पुलिस सूत्र ने बताया, डेरी वालों से मंथली लेने का खुलासा होने के बाद एसएचओ गाजीपुर को लाइन हाजिर किया गया था। इसके बाद से इंस्पेक्टर बाला शंकर राम उपाध्याय एसएचओ का काम देख रहे थे। 15 अगस्त के अवसर पर इलाके के एक स्कूल में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम रखा गया था, जहां एसएचओ भी पहुंचे। वहां उन्होंने छात्रों को तिरंगे बांटे। लेकिन हैरानी की बात रही कि वह छात्रों उल्टा तिरंगा दे रहे थे। उस दौरान फोटो भी खिंच रही थीं।
पुलिस का सोशल वर्क दिखाने के लिए ये फोटो डीसीपी ईस्ट अभिषेक धानिया को भेजी गईं। लेकिन इतनी बड़ी गलती पर उनकी भी नजर नहीं पड़ी और उन्होंने उन फोटो को अपने डीसीपी ईस्ट के सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर दिया। वहां किरकिरी शुरू हुई तो गलती का एहसास हुआ और पोस्ट डिलीट की गई। अब सोचने वाली बात है कि पुलिस अधिकारी जैसे जिम्मेदार लोगों की गलती से बच्चों के बीच क्या मेसेज गया होगा। हैरानी की बात यह है कि एक सूत्र ने गाजीपुर थाने का विडियो भी भेजा, जिसमें थाने के अंदर भी उल्टा तिरंगा लगा दिख रहा है। दावा है कि कई जगह से उल्टे तिरंगे हटा दिए गए, लेकिन फिर भी एक जगह उल्टा तिरंगा रह गया।
कानून के जानकार और कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट ओशियन चौधरी का कहना है कि यह तो सीधे-सीधे तिरंगे का अपमान है, क्योंकि उसे उल्टा कर दिया गया। ऐसे में राष्ट्रीय गौरव अपमान-निवारण अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई बनती है। यह अधिनियम राष्ट्रीय प्रतीकों, जैसे कि राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्रगान, और संविधान के अपमान को रोकने के लिए बनाया गया है। इस अधिनियम के तहत, इन प्रतीकों का अपमान करना दंडनीय अपराध है। यह अधिनियम पूरे भारत में लागू होता है। अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रीय ध्वज, संविधान या अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करता है, तो उसे तीन साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

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