ठगी के इंटरनेशनल गिरोह का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार

भारत से पैसा सीधे भेजा जाता था चीन

दक्षिणी दिल्ली। दक्षिणी पश्चिमी जिला पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट कर देशभर के लोगों को ठगने वाले चीनी गिरोह का पर्दाफाश उसके पांच भारतीय जालसाजों को गिरफ्तार किया है। ठग चीन में बैठे अपने आकाओं को बैंक खाते और मोबाइल सिमकार्ड उपलब्ध कराते थे। फिर इन खातों में पीड़ितों से ठगी की रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। पुलिस उपायुक्त सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि जालसाजों की पहचान उत्तर प्रदेश के झांसी के रसबहार कॉलोनी निवासी अभिषेक यादव, प्रेमनगर के इमरान कुरैशी, असद कुरैशी, जावेद और शास्त्री नगर के देव सागर के रूप में हुई है। पुलिस ने इनसे ठगी में इस्तेमाल 11 मोबाइल, छह एटीएम कार्ड, लैपटाप और कई बैंक खातों की चेक बुक बरामद की है। यह पांचों चीन से भारत में ठगी करने वाले गिरोह के लिए काम कर रहे थे।
आरोपित गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। यह टेलीग्राम ऐप के माध्यम से गिरोह को ठगी के पैसे भेजते थे। वह ठगी की रकम निकालकर दूसरे खाते में फर्जी खाते में जमा कर देते थे। फिर उस रकम के यूएस डालर खरीदकर चीन गिरोह की कंपनी को भेज देते थे। जालसाजों के खिलाफ विभिन्न राज्यों से 43 शिकायतें गृह मंत्रालय पोर्टल पर दर्ज हैं। पिछले साल आठ दिसंबर को द्वारका के राजनगर पार्ट दो निवासी गोपाल नाम के सेवानिवृत्त सेनाधिकारी ने बताया कि उन्हें मनी लान्ड्रिंग मामले में मुंबई कोर्ट द्वारा जारी गैर जमानती वारंट के बारे में एक काल आया था। जालसाजों ने उन्हें जेल भेजने का डर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट कर व्हाट्सऐप काल की निगरानी में रखा। फिर आरोपितों ने पीड़ित से 15 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिये थे।
पुलिस ने आरोपितों का पता लगाने के लिए मनी ट्रेल का पता लगाया। इससे पता चला कि ठगी की राशि प्रेस्टीज पल्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड शाखा नागपुर के डीबीएस बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी गई थी। यह खाता महाराष्ट्र के वर्धा निवासी वीरेंद्र रविंद्रजी कांबले के नाम पर पंजीकृत मिला। पुलिस ने वीरेंद्र का पता लगाकर उससे पूछताछ की। उसने पुलिस को बताया कि उसके पास खाता खोलने के लिए झांसी से एक व्यक्ति ने संपर्क किया था। इसके बाद से उसे खाते के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। पुलिस ने वीरेंद्र से संबंधित मोबाइल नंबर लेकर लोकेशन के आधार पर दिल्ली पहाड़गंज में छापेमारी की। यहां से इमरान कुरैशी, असद कुरैशी, देव सागर और जावेद को गिरफ्तार किया। आरोपितों ने पूरे फर्जीवाड़े के बारे में पुलिस को बताया कि वह छह महीने से चीनी गिरोह के साथ काम कर रहे हैं।
आरोपितों ने कहा कि वह झांसी निवासी अभिषेक यादव के संपर्क में आए थे। अभिषेक ने कहा था कि वह उन्हें आनलाइन अच्छा काम दिला सकता है। इससे मोटा मुनाफा मिलेगा। उसके कहने पर असद कुरैशी ने बैंक खाते खुलवाए और अपने निर्माण स्थल पर काम करने वाले मजदूरों के सिम कार्ड जारी करवाए। फिर खाते व सिमकार्ड अभिषेक को दे दिए। इसी तरह अन्य तीन आरोपितों ने भी किया।
आरोपितों ने बताया कि अभिषेक उनसे मिलता नहीं था। वह अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सऐप अकाउंट नंबर के जरिए बात करता था। अभिषेक उन्हें यूपीआइ के जरिए एक खाते पर पांच से छह हजार रुपये का कमीशन भेज देता था। फिर पुलिस ने मध्यप्रदेश के इंदौर में छापेमारी कर अभिषेक को गिरफ्तार किया। पुलिस अभी आरोपितों से उनके अन्य साथियों के बारे में भी पूछताछ कर रही है। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि अभिषेक ने मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड से आईटीआई की है। उसने बताया कि वह टेलीग्राम ऐप के माध्यम से चीनी गिरोह की कंपनी के संपर्क में आया था। वह सैंकड़ों बैंक खाते चीन के गिरोह को उपलब्ध कराए हैं। पुलिस उनका भी पता लगा रही है। इमरान कुरैशी ने बीए, असद कुरैशी ने आइटीआइ, देव सागर ने 10वीं और जावेद 8वीं पास है।

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