छत्तीसगढ़ आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में एडमिशन घोटाला, लाखों की डील में छात्रों का भविष्य दांव पर

रायपुर/एजेंसी। भारत में आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। लेकिन जब एडमिशन प्रक्रिया ही भ्रष्टाचार से ग्रसित हो जाए, तो यह न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करता है बल्कि समाज की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सीधा असर डालता है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के मनकी स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। लाखों रुपए लेकर प्रवेश दिलाने की खबरें शिक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य क्षेत्र की पारदर्शिता पर गहरा सवाल खड़ा करती हैं। अभिभावकों और छात्रों का कहना है कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा एडमिशन दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की वसूली की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, एडमिशन के लिए 3 से 5 लाख रुपए तक की मांग की जाती है। मेरिट और पारदर्शी प्रक्रिया को दरकिनार कर पैसे देकर सीट दिलाने का आरोप लगाया जा रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि मेरिट और काउंसलिंग प्रक्रिया को दरकिनार कर सीटें पैसों के आधार पर दी जा रही हैं। एडमिशन के नाम पर लाखों रुपए की डील की जा रही है, जिससे योग्य छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। कई छात्रों ने बताया कि उन्हें प्रवेश पाने के लिए “सिफारिश या रकम” की शर्त रखी गई।
हाल ही में मेडिकल कॉलेजों की मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को लेकर सीबीआई ने छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में छापेमारी की थी। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव स्थित आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, मनकी में प्रवेश के नाम पर लाखों रुपए की वसूली की खबरें सामने आना बेहद चिंताजनक है। योग्य और मेहनती छात्र पैसे की कमी के कारण बाहर रह जाते हैं, जबकि धनबल वाले प्रवेश पा जाते हैं। जब प्रवेश योग्यता पर नहीं बल्कि पैसे पर आधारित हो, तो डॉक्टरों की गुणवत्ता और समाज को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं। जनता का भरोसा शिक्षा संस्थानों और सरकार पर कमजोर होता जा रहा है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, रायगढ़, राजीव लोचन आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, दुर्ग, भारती आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, दुर्ग, चोकसे आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, बिलासपुर, महावीर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, राजनांदगांव भी भ्रष्टाचार और लूट का अड्डा बने हुए हैं ।
छत्तीसगढ़ आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, मनकी (राजनांदगांव) में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर उठे भ्रष्टाचार के आरोप केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं हैं। यह घटना हमारे शिक्षा और स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता पर गहरे प्रश्नचिह्न लगाती है। जब डॉक्टर बनाने वाले संस्थान ही धनबल के आगे झुक जाएं, तो समाज को मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। एडमिशन के नाम पर लाखों रुपए की वसूली की खबरें बताती हैं कि योग्यता और मेरिट अब पीछे छूट रहे हैं। मेहनती और प्रतिभाशाली छात्र पैसे की कमी के कारण बाहर रह जाते हैं, जबकि धनबल वाले प्रवेश पा जाते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल शिक्षा की आत्मा को आहत करती है बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को भी कमजोर करती है।
छत्तीसगढ़ आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, मनकी, राजनांदगांव में एडमिशन के नाम पर हो रहा भ्रष्टाचार शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव को कमजोर कर रहा है। यह केवल एक कॉलेज का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को योग्य चिकित्सक नहीं मिल पाएंगे और समाज को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। आयुर्वेद चिकित्सा मुख्यतः ग्रामीण और आम जनता की सेवा से जुड़ी है। भ्रष्टाचार से सबसे अधिक नुकसान गरीब और ग्रामीण समाज को होगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मेडिकल शिक्षा में भ्रष्टाचार जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में योग्य चिकित्सकों की कमी हो सकती है। सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है। जब पैसे वाले ही डॉक्टर बनेंगे, तो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों का सपना अधूरा रह जाएगा। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में बयान दिया कि “भ्रष्टाचार करने वालों को जेल जाना ही चाहिए।” उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार पारदर्शी और मेरिट आधारित प्रवेश प्रणाली को मजबूत करने के लिए कदम उठाएगी। सरकार ने संकेत दिए हैं कि ऑनलाइन एडमिशन पोर्टल को और सख्त बनाया जाएगा तथा स्वतंत्र निगरानी एजेंसियों की नियुक्ति की जाएगी। सरकार ने संकेत दिए हैं कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी। यह स्वागत योग्य कदम है, लेकिन केवल बयानबाज़ी से काम नहीं चलेगा। ऑनलाइन और मेरिट आधारित प्रवेश प्रणाली को और सख्त बनाना होगा। साथ ही, स्वतंत्र निगरानी एजेंसियों की नियुक्ति और पारदर्शी फीस संरचना को लागू करना आवश्यक है।
समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इस भ्रष्टाचार को स्वीकार न करे। अभिभावकों और छात्रों को चाहिए कि वे शिकायत दर्ज कराएं और इस प्रवृत्ति का विरोध करें। शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की नींव होते हैं। यदि इनकी जड़ें भ्रष्टाचार से खोखली हो जाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को योग्य चिकित्सक नहीं मिल पाएंगे और समाज को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, मनकी का मामला हमें चेतावनी देता है कि अब समय आ गया है—पारदर्शिता और ईमानदारी को शिक्षा व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।

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