सूडान में फंसे 4 हजार भारतीय, लोगों की निकासी है बड़ी चुनौती, रेस्क्यू कितना मुश्किल?

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क।  सूडान की राजधानी बम धमाकों तथा भारी गोलाबारी से दहलती रही है। सूडान में प्रतिद्वंद्वी जनरलों के प्रति वफादार बलों के बीच लड़ाई लगातार जारी है। सूडानी सेना और एक प्रतिद्वंद्वी अर्धसैनिक बल बीते दिन 24 घंटे के संघर्ष विराम के लिए सहमत हुए थे, हालांकि इसका पालन नहीं दिखा। सूडान के ताजा हालात ने भारत के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी है। इस लड़ाई में तीन हजार से अधिक भारतीयों की सुरक्षा का संकट गहरा गया है। सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच भीषण लड़ाई के कारण वहां फंसे कई भारतीयों के चिंतित परिजन अपने रिश्तेदारों के बारे में किसी जानकारी की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही चिंतित परिजनों ने सरकार से अपील की है कि संकटग्रस्त अफ्रीकी देश में फंसे लोगों को निकालने की व्यवस्था की जाए।

सूडान की राजधानी खार्तूम में भारतीय दूतावास भी भीषण लड़ाई वाले क्षेत्र में फंस गया है। ऐसे में दूतावास के अधिकारियों और स्टाफ को घर से काम करना पड़ रहा है। जंग की वजह से बिजली और संपर्क के साधन भी सीमित शेष हैं। वहीं भारतीयों के लिए एयरलिफ्ट अभियान को अंजाम देना भी मुश्किल है। सूडान में लड़ाई 15 अप्रैल को शुरू हुई और अब तक एक भारतीय सहित कम से कम 185 लोगों की मौत होने की खबर है, वहीं 1,800 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। सरकार के सूत्रों ने नयी दिल्ली में कहा कि सूडान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत विभिन्न देशों के साथ समन्वय कर रहा है। इन देशों में अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब शामिल हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सूडान की स्थिति पर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में अपने समकक्षों से बातचीत की है और उन्होंने उन्हें उस देश में भारतीयों की सुरक्षा के लिए व्यवहारिक समर्थन का आश्वासन दिया है। सूडान का अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) लूटपाट कर रहा है और लोगों की कारों को भी ले जा रहा है। सूडान में करीब 4,000 भारतीय हैं जिनमें करीब 1200 लोग सूडान में बस गए थे और वे वहां करीब 150 वर्षों से हैं। अन्य प्रवासी भारतीय सूडान में पेशेवरों के रूप में काम कर रहे हैं, वहीं कुछ भारतीय संयुक्त राष्ट्र मिशन और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में काम कर रहे हैं।

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