दिल्ली वाले ध्यान दें! यमुना में मूर्ति विसर्जन किया तो 50 हजार जुर्माना या 6 साल जेल की सजा

  • गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा के दौरान यमुना में मूर्तियां विसर्जित करने पर लगी रोक
  • उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना या 6 साल जेल की सजा तक हो सकती है
  • डीपीसीसी ने कहा कि मूर्ति बनाने में इस्तेमाल होने वाले जहरीले रसायन पानी को दूषित करते हैं

नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी के मद्देनजर इस साल यमुना नदी में मूर्ति विसर्जन करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डीपीसीसी) ने जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि इस साल गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा के दौरान यमुना या किसी अन्य जल निकाय में मूर्तियां विसर्जित न की जाएं। डीपीसीसी ने सोमवार को जारी एक आदेश में कहा है कि उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना या छह साल जेल की सजा तक हो सकती है।

डीपीसीसी ने शहरी स्थानीय निकायों को मूर्ति विसर्जन के लिए आवासीय क्षेत्रों के निकट कृत्रिम तालाब बनाने के लिए भी कहा है। बोर्ड ने दिल्ली पुलिस को शहर में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियां ले जाने वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने का भी निर्देश दिया है। नगर निकायों से कहा गया है कि वे सभी अंचल कार्यालयों को अवैध मूर्ति निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश जारी करें।

डीपीसीसी ने कहा कि मूर्ति विसर्जन गंभीर समस्या पैदा करता है क्योंकि उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले जहरीले रसायन पानी में मिल जाते हैं। इस साल 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी और 9 सितंबर को मूर्ति विसर्जन होगा। हालांकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 2015 में यमुना में मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन दिल्ली सरकार ने 2019 में इस संबंध में निर्देश जारी किए थे।

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