गन्ना किसानों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, ₹4,500 प्रति टन पहली किस्त की मांग; मुंबई-पुणे में दूध-सब्जियों की आपूर्ति रोकने की चेतावनी

महाराष्ट्र में गन्ने के दाम को लेकर चल रहा आंदोलन और तेज हो गया। इस आंदोलन की वजह से पुणे-बेंगलुरु राजमार्ग पर कई जगहों पर यातायात प्रभावित हुआ है। कोल्हापुर में किनी टोल प्लाजा के अलावा, किसानों ने सतारा जिले में नागठाणे के पास भी रास्ते जाम कर दिए हैं।

महाराष्ट्र में किसानों का प्रदर्शन

कोल्हापुर,महाराष्ट्र। महाराष्ट्र में गन्ने के उचित मूल्य और भुगतान को लेकर किसानों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर किनी टोल नाका के पास पूर्व सांसद एवं स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के संस्थापक राजू शेट्टी के नेतृत्व में हजारों किसान लगातार दूसरे दिन भी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे रहे। किसानों की प्रमुख मांग है कि मौजूदा पेराई सीजन में चीनी मिलों को भेजे गए गन्ने के बदले उन्हें पहली किस्त के रूप में कम से कम 4,500 रुपये प्रति टन का भुगतान किया जाए। आंदोलन के दो दिन बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से किसी मंत्री या अधिकृत प्रतिनिधि के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर किसानों से बातचीत करने की सूचना नहीं है।

आंदोलन में शामिल सैकड़ों किसान रातभर सड़क पर ही डटे रहे। पूर्व सांसद राजू शेट्टी भी किसानों के साथ धरनास्थल पर मौजूद रहे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार ने जल्द हस्तक्षेप कर किसानों की मांगों पर समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने कहा है कि मांगें नहीं माने जाने पर मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में दूध और सब्जियों की आपूर्ति रोककर विरोध प्रदर्शन तेज किया जा सकता है। संगठन का कहना है कि गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और समय पर भुगतान मिलना चाहिए।

किसानों के आंदोलन का असर पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग के यातायात पर भी पड़ रहा है। हाईवे पुलिस ने कराड से कागल के बीच कई स्थानों पर वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए हैं। प्रदर्शन स्थल के दोनों ओर बड़ी संख्या में ट्रक और अन्य भारी वाहन फंसे हुए हैं। यात्रियों और वाहन चालकों को परेशानी से बचाने के लिए पुलिस ने डायवर्जन का पालन करने की अपील की है। कराड और पुणे की ओर पेठ नाका के पास, जबकि कोल्हापुर की ओर सांगली फाटा, तोप, वाथर, कागल और उचगांव फाटा के आसपास यातायात को वैकल्पिक रास्तों से निकाला जा रहा है।

इस बीच, किसानों और चीनी मिलों के बीच भुगतान को लेकर जारी गतिरोध समाप्त कराने के प्रयास भी शुरू होने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, कोल्हापुर के जिला कलेक्टर विजय राठौड़ इस मामले में हस्तक्षेप कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने चीनी मिल मालिकों से भुगतान संबंधी प्रस्ताव मांगा है। प्रस्ताव के तहत मिलें पहली किस्त के रूप में 3,800 से 3,900 रुपये प्रति टन देने और पेराई सीजन समाप्त होने के बाद अतिरिक्त 150 से 200 रुपये प्रति टन भुगतान करने पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम सहमति की पुष्टि नहीं हुई है और किसानों की मांग 4,500 रुपये प्रति टन की पहली किस्त पर कायम है।

इधर, चीनी उद्योग से जुड़े आर्थिक मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण चर्चा प्रस्तावित है। कर्नाटक का दौरा पूरा करने के बाद विशेषज्ञ रमेश चंद के नेतृत्व वाली केंद्रीय टीम पुणे स्थित चीनी आयुक्त कार्यालय में महाराष्ट्र के विभिन्न हितधारकों के साथ बैठक करेगी। इस समिति के सामने चीनी उद्योग की ओर से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम और इथेनॉल की खरीद कीमत बढ़ाकर 70 रुपये प्रति किलोग्राम करने का प्रस्ताव रखा जाना है। उद्योग जगत का तर्क है कि चीनी और इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी से मिलों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और उन्हें किसानों का भुगतान समय पर करने में मदद मिल सकेगी।

फिलहाल किनी टोल नाका के पास किसानों का धरना जारी है और राजमार्ग पर यातायात प्रभावित बना हुआ है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार के रुख, जिला प्रशासन की पहल और चीनी मिल मालिकों के प्रस्ताव पर टिकी हैं। यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकला तो किसानों का आंदोलन और व्यापक होने के साथ-साथ मुंबई और पुणे की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।

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