दिल्ली पुलिस मुख्यालय में अभूतपूर्व प्रदर्शन, एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के समर्थन में लामबंद हुए पुलिसकर्मी
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने तबादलों के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें उनकी तीन प्रमुख मांगें अधिकारियों के लिए चुनौती बन गईं। अब दूसरे दौर की तैयारी की जा रही है ताकि स्थिति को शांत किया जा सके।

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस मुख्यालय में अधिकारियों के फैसले के खिलाफ पुलिसकर्मियों का सामूहिक विरोध सामने आने से महकमे में हलचल मच गई है। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में जुटे पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की और तबादलों के फैसले पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के साथ हुई पहली बैठक बेनतीजा रही। अब मामले को सुलझाने के लिए बातचीत का दूसरा दौर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।
पुलिसकर्मियों की नाराजगी कड़कड़डूमा कोर्ट में वकीलों और पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ तथा संबंधित थाना प्रभारी के तबादले से जुड़ी है। इन अधिकारियों को कम सक्रिय इकाइयों में भेजे जाने के फैसले को लेकर पुलिसकर्मियों में असंतोष है। उनका आरोप है कि बाहरी दबाव में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे पुलिस बल का मनोबल प्रभावित हो रहा है।
पुलिस आयुक्त के साथ बैठक में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने अपनी प्रमुख मांगें रखीं। इनमें वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को रद्द नहीं करने, बार काउंसिल के सदस्य का नाम मुकदमे से नहीं हटाने और प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करने की मांग शामिल है। वशिष्ठ ने यह भी कहा कि यदि विभाग निलंबन या कोई अन्य सख्त कार्रवाई करना चाहता है तो वह केवल उनके खिलाफ की जाए, अन्य पुलिसकर्मियों को निशाना न बनाया जाए।
बैठक के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने पुलिस आयुक्त के सामने अपनी मांगें रख दी हैं और उन पर चर्चा जारी है। उनके अनुसार, कुल पांच मांगें थीं और कुछ मामलों का समाधान तत्काल किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी प्रदर्शन करने नहीं, बल्कि अपनी बात रखने और सभा करने आए हैं। यदि आज फैसला नहीं होता है तो वे वहां से नहीं हटेंगे। अधिकारियों की ओर से चर्चा के बाद जवाब दिए जाने की बात कही गई है।
पहली बैठक में सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण पुलिस प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है। एक ओर पुलिसकर्मियों की मांगों और असंतोष को दूर करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर विभागीय अनुशासन और प्रशासनिक फैसलों का संतुलन बनाए रखना भी अधिकारियों के लिए अहम है। अब सबकी नजरें प्रस्तावित दूसरी बैठक और उसमें निकलने वाले समाधान पर टिकी हैं।




