खुद वाइन बेच रहे हैं और बातें शराब बैन की… लद्दाख में सोनम वांगचुक के खिलाफ शराब व्यापारियों ने खोला मोर्चा
सोनम वांगचुक की शराब मुक्त केंद्र शासित प्रदेश की मांग पर ऑल ऑल लद्दाख लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने पलटवार किया है। एसोसिएशन ने वांगचुक पर चुन-चुनकर चुनिंदा मुद्दे उठाने का आरोप लगाया है। एसोसिएशन ने पूछा है कि वांगचुक सिर्फ शराब पर प्रतिबंध लगाने की बात क्यों कर रहे हैं, जबकि नशीले पदार्थों के सेवन, धूम्रपान और मांस के सेवन जैसे मुद्दों पर कोई बात नहीं हो रही है।

श्रीनगर/लेह। लद्दाख को शराब मुक्त केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और शराब कारोबारियों के बीच विवाद गहरा गया है। ऑल लद्दाख लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने वांगचुक के शराबबंदी संबंधी रुख पर सवाल उठाते हुए उनसे पूछा है कि जब वे शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं, तो धूम्रपान, मांस सेवन और अन्य नशीले पदार्थों के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर भी समान रूप से आवाज क्यों नहीं उठाई जा रही है। एसोसिएशन ने वांगचुक के परिवार से जुड़े सेब से बनी वाइन ब्रांड ‘उले टोपो’ के लाइसेंस को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लद्दाख में शराब की बिक्री और कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि शराबबंदी की मांग चुनिंदा तरीके से उठाई जा रही है। प्रतिनिधियों ने सवाल किया कि यदि मांस सेवन, धूम्रपान और अन्य नशीले पदार्थों पर भी समान नियम लागू किए जाते हैं, तो एसोसिएशन शराबबंदी का समर्थन करने को तैयार है। उन्होंने वांगचुक से शराब व्यापारियों के रोजगार और आजीविका में हस्तक्षेप नहीं करने की अपील भी की।
एसोसिएशन ने वांगचुक के भाई से जुड़ी बताई जा रही सेब से बनी वाइन के ब्रांड ‘उले टोपो’ के लाइसेंस पर भी सवाल उठाया। प्रतिनिधियों ने पूछा कि क्या इस ब्रांड के पास अपने उत्पादों के निर्माण और बिक्री के लिए आवश्यक सरकारी अनुमति है। यदि लाइसेंस नहीं है तो प्रशासन ने अब तक इस संबंध में क्या कार्रवाई की है? हालांकि, इस संबंध में लगाए गए सवालों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दरअसल, लद्दाख में नई आबकारी नीति को लेकर पिछले कुछ समय से विरोध चल रहा है। एक जून 2026 से लागू की गई आबकारी नीति 2026-27 में शराब की खुदरा दुकानों की संख्या दो से बढ़ाकर 20 करने का प्रस्ताव था। सोनम वांगचुक ने इस नीति का विरोध करते हुए लद्दाख को शराब मुक्त क्षेत्र बनाने की मांग उठाई थी। उनका आरोप था कि प्रशासन शराब को बढ़ावा दे रहा है और रिहायशी इलाकों तथा स्कूलों के आसपास बार और शराब की दुकानें खोलने की दिशा में कदम उठा रहा है।
इस मुद्दे पर लद्दाख के महिला संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन की महिला शाखा, अंजुमन-ए-इमामिया की महिला शाखा, अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम की महिला शाखा और ईसाई समुदाय की महिला शाखा ने नई आबकारी नीति वापस लेने तथा लद्दाख को शराब मुक्त केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की मांग की थी। इन संगठनों ने आशंका जताई थी कि शराब की दुकानों और बार की संख्या बढ़ने से युवाओं, सामाजिक वातावरण तथा लद्दाख की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वांगचुक ने 30 अक्टूबर को बताया था कि महिला संगठनों ने अपना विरोध प्रदर्शन रोक दिया है। उनके अनुसार, प्रशासन उनकी मांगों पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया था और समझौते को लिखित रूप देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया था।
दूसरी ओर, लद्दाख प्रशासन ने 28 अक्टूबर को वांगचुक के उन आरोपों को खारिज किया था, जिनमें स्कूलों और रिहायशी इलाकों के पास शराब की दुकानें तथा बार खोले जाने की बात कही गई थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि नई आबकारी नीति स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों से मिले सुझावों के बाद 26 अगस्त को वापस ले ली गई थी तथा पुरानी आबकारी नीति फिर से लागू कर दी गई है।
इस पूरे विवाद ने लद्दाख में शराब नीति, सामाजिक परंपराओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्थानीय कारोबारियों की आजीविका को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर महिला संगठन और शराबबंदी के समर्थक शराब की उपलब्धता सीमित करने की मांग कर रहे हैं, वहीं शराब कारोबारी इसे अपने रोजगार से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। अब इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई और महिला संगठनों के साथ प्रस्तावित समझौते पर सबकी नजरें टिकी हैं।




