मध्य पूर्व को महाशक्तियों की दुश्मनी का अखाड़ा न बनाएं: शी जिनपिंग, ओमान के सुल्तान से मुलाकात में अमेरिका को परोक्ष संदेश
ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद के बीजिंग दौरे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मध्य पूर्व संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा है कि मध्य पूर्व को बड़ी ताकतों की दुश्मनी का मैदान नहीं बनना चाहिए।

बीजिंग,एजेंसी। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बड़ी शक्तियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र को महाशक्तियों की आपसी दुश्मनी का मैदान नहीं बनाया जाना चाहिए। सोमवार को बीजिंग में ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद के साथ हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने की अपील की। जिनपिंग ने कहा कि चीन स्थायी शांति हासिल करने के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है। उनके इस बयान को मध्य पूर्व संघर्ष में अमेरिका की भूमिका पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी जिनपिंग ने बातचीत के दौरान कहा कि मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र को बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा, दुश्मनी और भू-राजनीतिक टकराव का अखाड़ा नहीं बनना चाहिए। इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा और संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए। चीन का मानना है कि संघर्ष का समाधान सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से निकाला जाना चाहिए।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच चीन का यह बयान उसकी विदेश नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक बीजिंग ने इस संघर्ष में प्रत्यक्ष सैन्य भूमिका से दूरी बनाए रखी है और कूटनीतिक स्तर पर शांति तथा संवाद की पैरवी करता रहा है। ओमान के सुल्तान के साथ जिनपिंग की मुलाकात और संयुक्त बयान को इसी कूटनीतिक पहल के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
इस मुलाकात के दौरान चीन और ओमान ने 30 बिंदुओं वाला संयुक्त वक्तव्य भी जारी किया। इसमें दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य और सुरक्षित समुद्री आवागमन बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या नौवहन में बाधा अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
संयुक्त वक्तव्य में चीन और ओमान ने अमेरिका तथा ईरान से शांतिपूर्ण विकल्प अपनाने और जून में हुए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की दिशा में लौटने की अपील भी की। दोनों देशों ने संकेत दिया कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और आपसी सहमति से ही संभव है। होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन बहाल करना केवल संबंधित देशों के हित में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी आवश्यक है।
ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद ने इस अवसर पर मध्य पूर्व के मौजूदा हालात को लेकर चीन के रुख की सराहना की। उन्होंने कहा कि विकास और स्थिरता एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि किसी क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल नहीं होगा तो वहां आर्थिक विकास की संभावनाएं भी प्रभावित होंगी। उन्होंने जोर दिया कि देशों की तरक्की के लिए स्थिरता, सुरक्षा और शांतिपूर्ण वातावरण बेहद जरूरी हैं।
बैठक में चीन और ओमान के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। ओमान के सुल्तान ने चीन के साथ विशेष द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश समझौते में शामिल होने की इच्छा भी जाहिर की। उनका कहना था कि इस प्रकार की व्यवस्था से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
ओमान की भौगोलिक स्थिति उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा परिवहन के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित होने के कारण खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और समुद्री आवागमन में उसकी अहम भूमिका है। चीन के लिए भी ओमान रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग केवल आर्थिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों की नजर में चीन और ओमान की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब मध्य पूर्व में तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है। चीन एक ओर क्षेत्रीय देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर खुद को शांति और कूटनीतिक समाधान के समर्थक के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। हालांकि, इस पहल का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष से जुड़े पक्ष बातचीत के रास्ते पर लौटने के लिए कितने तैयार होते हैं।
फिलहाल शी जिनपिंग का बयान और चीन-ओमान का संयुक्त वक्तव्य मध्य पूर्व में शांति स्थापना की कूटनीतिक कोशिशों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका, ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में यदि संवाद आगे बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर भी दिखाई दे सकता है। चीन ने अपने संदेश के जरिए स्पष्ट किया है कि वह मध्य पूर्व को महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनाने के बजाय वहां स्थायी शांति और सुरक्षित व्यापारिक आवागमन का पक्षधर है।




