मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण, भारतीय महिला कुश्ती को दिलाई ऐतिहासिक पहचान
मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा, वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। उन्होंने अपनी जीत को पिता को समर्पित किया और भविष्य में 2028 ओलंपिक पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय महिला पहलवान मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। महिलाओं के 59 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में उन्होंने अमेरिका की अबीगैल नेत्ते को रोमांचक संघर्ष के बाद हराकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ मनीषा ने भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। उनकी इस उपलब्धि के पीछे वर्षों का संघर्ष, कठिन अभ्यास, दृढ़ संकल्प और परिवार तथा कोच का सहयोग रहा है।
अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए मनीषा ने अपने पिता से मिले जीवन के एक महत्वपूर्ण सबक को याद किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि जिस काम को शुरू करो, उसे पूरा करके ही छोड़ना चाहिए। किसी भी काम को बीच में अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। मनीषा के अनुसार, यही सीख उनके संघर्ष और खेल जीवन में प्रेरणा का आधार बनी। उन्होंने कहा कि कुश्ती उनके लिए पहला और आखिरी विकल्प है। इस खेल ने उन्हें जीवन, पहचान और आगे बढ़ने का रास्ता दिया है।
पिता के साथ अपने भावनात्मक रिश्ते को याद करते हुए मनीषा ने कहा कि उनके बारे में ज्यादा कुछ कहना उनके लिए आसान नहीं है। उन्हें लगता है कि उनके पिता हमेशा उनके भीतर मौजूद हैं और उनसे बात करते रहते हैं। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि वह हर दिन अपने पिता को याद कर रोती हैं और वे हमेशा उनके दिल में रहते हैं। मनीषा ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और कोच को भी दिया।
विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने को लेकर मनीषा को पहले से भरोसा था। उन्होंने बताया कि एशियन गेम्स में पदक हासिल नहीं कर पाने के बाद विश्व चैंपियनशिप उनके लिए सबसे बड़ा लक्ष्य बन गई थी। वह इस प्रतियोगिता में पदक जीतना चाहती थीं और उन्हें विश्वास था कि उनकी मेहनत रंग लाएगी। उनके मुताबिक, इस चैंपियनशिप में सफलता हासिल करना उनके लिए बेहद जरूरी था।
फाइनल मुकाबले में मनीषा को शुरुआत में अमेरिकी पहलवान के सामने संघर्ष करना पड़ा और वह कुछ समय तक पिछड़ती रहीं। हालांकि, उन्होंने धैर्य नहीं खोया और अपनी रणनीति के अनुसार मुकाबला जारी रखा। शानदार वापसी करते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया। मनीषा ने बताया कि अलग-अलग भार वर्गों के पहलवानों के साथ अभ्यास करने का अनुभव इस मुकाबले में उनके काफी काम आया। अभ्यास के दौरान उन्हें विभिन्न भार वर्गों की पहलवानों के साथ मुकाबला करने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी तैयारी और रणनीति को मजबूती मिलती है।
मनीषा चार अलग-अलग भार वर्गों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उनका मानना है कि अलग-अलग भार वर्गों में खेलने के अनुभव ने उन्हें एक बेहतर पहलवान बनाया है। उन्होंने खुद को भाग्यशाली बताया कि उन्हें चार भार वर्गों में देश का प्रतिनिधित्व करने और पदक जीतने का अवसर मिला।
इस ऐतिहासिक जीत के बाद मनीषा की नजर अब 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर है। उन्होंने बताया कि स्वर्ण पदक जीतने के बाद शाम को कोच और पूरी टीम के साथ बैठक हुई, जिसमें आगे की तैयारियों और प्रतियोगिताओं को लेकर चर्चा की गई। अब उनका ध्यान सीनियर नेशनल प्रतियोगिता और उसके बाद होने वाली प्रो रेसलिंग लीग पर रहेगा। इसके बाद भारतीय कुश्ती शिविर शुरू होने पर ओलंपिक की तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा।
मनीषा के अनुसार, आगामी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने को लेकर अंतिम निर्णय कोच और पूरी टीम मिलकर करेंगे। किस प्रतियोगिता में खेलना है और किसमें नहीं, इसकी योजना तैयारी और जरूरत के अनुसार बनाई जाएगी। विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक मनीषा के लिए केवल एक बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके लंबे संघर्ष, पिता की सीख और परिवार के सहयोग का परिणाम भी है। अब देश की निगाहें उनकी आगामी तैयारियों और 2028 ओलंपिक के सफर पर टिकी हैं।




