अमरकंटक में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का राज्य स्तरीय शुभारंभ, बाल अधिकारों और साइबर सुरक्षा पर दिया जोर
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में रविवार को ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का राज्य स्तरीय शुभारंभ न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने किया। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति दीपक खोत और न्यायमूर्ति आनंद पाठक सहित अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।

सुमिता शर्मा/जिला ब्यूरो चीफ
अनूपपुर,मध्य प्रदेश। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में रविवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजना ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का मध्यप्रदेश में राज्य स्तरीय शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधिपति एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने किया। इस अवसर पर बाल अधिकारों, बच्चों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति दीपक खोत और न्यायमूर्ति आनंद पाठक, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर की अध्यक्ष माया विश्वलाल और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एन.एस. हरिनारायण मूर्ति सहित न्यायिक एवं विधिक सेवा संस्थानों के अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद राष्ट्रीय गीत और नालसा के थीम गीत का गायन किया गया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने साइबर अपराध और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, साइबर अपराधों से बचाव और सुरक्षित रहने के उपायों की जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने, खेलने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए अनुकूल वातावरण मिलना चाहिए। इसके लिए उनके अधिकारों और सुरक्षा का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों तथा जरूरत पड़ने पर उपलब्ध विधिक सहायता की जानकारी देना है। अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक जनजागरूकता और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
न्यायमूर्ति दीपक खोत ने कहा कि वर्तमान समय में बाल सुरक्षा केवल घर और विद्यालय तक सीमित नहीं रह गई है। मोबाइल फोन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डिजिटल दुनिया में भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। बच्चों को साइबर अपराध, ऑनलाइन शोषण और इंटरनेट से जुड़े अन्य खतरों के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है।
मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों का सुरक्षित और संरक्षित बचपन ही देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। उन्होंने बाल अधिकारों की रक्षा और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका तथा उनके दायित्वों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में आमंत्रित विशेषज्ञों ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इस्कॉन मंदिर उज्जैन के प्रेमावतार दास, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के उप सचिव अनिरुद्ध जैन, संगीता श्रीवास्तव और रावेन्द्र शर्मा ने तनावमुक्त जीवनशैली, ध्यान, एकाग्रता और अनुशासन के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अतिरिक्त सचिव अरविन्द श्रीवास्तव, अनूपपुर जिला मुख्यालय तथा कोतमा और राजेन्द्रग्राम के तहसील सिविल न्यायालयों के न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मनीष कुमार पाटीदार, जिला विधिक सहायता अधिकारी प्रदीप ठाकुर, बृजेश पटेल, जितेन्द्र मोहन धुर्वे, विश्वविद्यालय के अतिरिक्त रजिस्ट्रार संजीव सिंह और सहायक रजिस्ट्रार पूजा सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भेजरी और पोंड़की के शिक्षक तथा विद्यार्थी भी शामिल हुए। आयोजन के माध्यम से बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, बाल संरक्षण, साइबर अपराधों की रोकथाम और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध विधिक सहायता के प्रति जागरूक किया गया। वक्ताओं ने सुरक्षित बचपन को बच्चों के सर्वांगीण विकास की बुनियादी शर्त बताते हुए इसके लिए परिवार, विद्यालय, प्रशासन और समाज के सभी वर्गों की साझा जिम्मेदारी पर बल दिया।




