लखनऊ के दिग्गज ज्योतिषी और भविष्यवक्ता की पत्नी को एमएलसी चुनाव में करारी शिकस्त
लखनऊ स्नातक एमएलसी चुनाव के रिजल्ट का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, वोटों की गिनती के बीच उम्मीदवार स्मिता मिश्रा की दावेदारी खत्म हो गई है।

लखनऊ,एजेंसी। उत्तर प्रदेश के लखनऊ खंड स्नातक विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह के बढ़त बनाने की खबरों के बीच निर्दलीय प्रत्याशी स्मिता मिश्रा का प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, स्मिता मिश्रा 300 मतों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकीं। हालांकि, चुनाव परिणाम की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। स्मिता ने अपनी हार के लिए मतदाता सूची में समर्थकों के नाम शामिल नहीं होने सहित कई कारणों को जिम्मेदार ठहराया है।
स्मिता मिश्रा पिछले करीब दो वर्षों से इस चुनाव की तैयारी करने का दावा कर रही थीं। उन्होंने लखनऊ खंड के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क किया था। चुनाव में अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कई समर्थकों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए। इसके अलावा, उन्होंने मतदान के दौरान बूथों पर अपने एजेंटों को नहीं बैठने देने और चुनाव में धनबल के इस्तेमाल के आरोप भी लगाए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्मिता मिश्रा के चुनावी सफर की चर्चा उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी हो रही है। उन्होंने 28 सितंबर को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। उस समय उन्हें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पार्टी में शामिल कराया था। माना जा रहा था कि वह कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन बाद में पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला किया।
स्मिता मिश्रा प्रख्यात ज्योतिषी और भविष्यवक्ता आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी हैं। चुनाव में उनके कमजोर प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग उनके पति की भविष्यवाणियों का हवाला देते हुए सवाल उठा रहे हैं कि क्या उन्हें अपनी पत्नी के चुनावी नतीजे का पूर्वानुमान नहीं था। हालांकि, ये टिप्पणियां सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं का हिस्सा हैं, न कि चुनावी परिणाम के विश्लेषण का कोई प्रमाणित आधार।
स्मिता मिश्रा ने कहा कि उन्होंने विधान परिषद चुनाव सत्ता-सुख हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि जनसेवा और परोपकार के उद्देश्य से लड़ने का निर्णय लिया था। उनके अनुसार, चुनाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बावजूद वह सामाजिक कार्य जारी रखेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह अब वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटेंगी।
स्मिता मिश्रा के मुताबिक, उनकी पार्टी नवयुवक दल आगामी विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरेगी और कम से कम 50 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करने की योजना है। उन्होंने पार्टी के गठन का वर्ष 2014 बताया और आगे भी जनहित से जुड़े मुद्दों पर काम करने की बात कही।
लखनऊ स्नातक एमएलसी चुनाव में स्मिता मिश्रा के प्रदर्शन ने उनकी राजनीतिक रणनीति और भविष्य की योजनाओं को चर्चा में ला दिया है। वहीं, मतदाता सूची में नाम न होने, बूथों पर एजेंटों को बैठने से रोकने और धनबल के इस्तेमाल से जुड़े उनके आरोपों की पुष्टि संबंधित चुनावी तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकेगी।




