पाकिस्तान में गहराया गैस संकट, एलपीजी 600 रुपये किलो तक पहुंची; चूल्हा जलाना हुआ महंगा
पाकिस्तान में ईरान सीमा बंद होने से एलपीजी संकट गहरा गया है, जिससे कीमतें 600 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। लोग खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।

इस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान में सर्दियों की आहट से पहले घरेलू ईंधन का संकट गहराने लगा है। ईरान से लगने वाली प्रमुख सीमा चौकियों पर आवाजाही बाधित होने के कारण तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि देश के कुछ हिस्सों में एलपीजी की कीमत 600 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जो सरकारी निर्धारित दर से दोगुने से भी अधिक है। बलूचिस्तान में घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 4,500 रुपये से बढ़कर करीब 7,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंचने की खबर है। महंगी गैस ने आम परिवारों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है और कई लोगों को खाना पकाने के लिए लकड़ी तथा कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, पाकिस्तान में एलपीजी की आधिकारिक कीमत अक्टूबर के लिए लगभग 279 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई थी, लेकिन कई इलाकों में इसकी बिक्री इससे कहीं अधिक कीमत पर होने की बात सामने आई है। पहाड़ी क्षेत्रों और प्रमुख शहरों में महंगी गैस के कारण आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रावलपिंडी और इस्लामाबाद जैसे शहरों में पाइपलाइन से मिलने वाली प्राकृतिक गैस की सीमित उपलब्धता ने भी परेशानी बढ़ाई है। ऐसे में घरेलू ईंधन की बढ़ती कीमतें केवल महंगाई का मामला नहीं रह गई हैं, बल्कि लाखों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी समस्या बनती जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि 23 अक्टूबर को गाबद-रिमदान और तफ्तान सीमा चौकियों पर आवाजाही बाधित होने के बाद ईरान से आने वाले गैस टैंकर रास्तों में फंस गए। इससे आपूर्ति शृंखला पर असर पड़ा और बाजार में एलपीजी की उपलब्धता घटने लगी। पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में ईरान से आने वाली गैस की आपूर्ति महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, सीमा बंद होने की अवधि, प्रभावित टैंकरों की संख्या और आपूर्ति में आई वास्तविक गिरावट की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
गैस की मौजूदा किल्लत ने पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था की पुरानी कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। देश में प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन लगातार घट रहा है, जबकि मांग पूरी करने के लिए महंगी आयातित गैस पर निर्भरता बढ़ी है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020 में देश का प्राकृतिक गैस उत्पादन लगभग 3,597 मिलियन घन फुट प्रतिदिन था, जो वित्त वर्ष 2025 में घटकर करीब 2,890 मिलियन घन फुट प्रतिदिन रह गया। यह पांच वर्षों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। घरेलू उत्पादन में कमी के कारण ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सरकार के लिए लगातार चुनौतीपूर्ण होता गया है।
प्राकृतिक गैस, एलपीजी और तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी के बीच अंतर समझना भी इस संकट की तस्वीर स्पष्ट करता है। प्राकृतिक गैस मुख्य रूप से पाइपलाइन के जरिये उपभोक्ताओं तक पहुंचती है। एलपीजी को दबाव के तहत सिलिंडरों में भरकर घरेलू खाना पकाने सहित कई कामों में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, एलएनजी प्राकृतिक गैस को अत्यंत कम तापमान पर तरल बनाकर जहाजों के माध्यम से आयात करने और फिर दोबारा गैस में बदलकर इस्तेमाल करने की व्यवस्था है। तीनों ईंधनों की आपूर्ति, भंडारण और वितरण की प्रणालियां अलग-अलग हैं। इसलिए एलएनजी का भंडार उपलब्ध होने के बावजूद हर क्षेत्र में एलपीजी की कमी अपने आप दूर नहीं हो जाती।
पाकिस्तान ने घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन में गिरावट के बाद वर्ष 2015 से आयातित एलएनजी पर अपनी निर्भरता बढ़ाई। कतर और अन्य अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ दीर्घकालिक समझौतों के माध्यम से गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया। लेकिन इन समझौतों की शर्तों, घरेलू मांग में बदलाव और सीमित भंडारण क्षमता ने ऊर्जा प्रबंधन को जटिल बना दिया है। कुछ समझौतों में न्यूनतम मात्रा खरीदने की बाध्यता होने से मांग घटने पर भी आयात का वित्तीय बोझ बना रह सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विश्लेषणों के अनुसार, सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल और राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से मांग में बदलाव के कारण पाकिस्तान में एलएनजी की खपत पर भी असर पड़ा है। इससे एक विरोधाभासी स्थिति पैदा हो सकती है—एक ओर घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी और ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर आयातित गैस की उपलब्ध मात्रा और वास्तविक मांग के बीच असंतुलन पैदा हो जाता है। सीमित भंडारण सुविधाओं और आयात समझौतों की बाध्यताओं के चलते अतिरिक्त गैस का प्रबंधन भी चुनौती बन सकता है। हालांकि, मौजूदा अतिरिक्त भंडार की मात्रा और उसकी उपयोगिता के संबंध में ताजा आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है।
इस ऊर्जा संकट का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं है। कृषि, उर्वरक, बिजली उत्पादन और विनिर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र भी गैस पर निर्भर हैं। यदि उर्वरक कारखानों को पर्याप्त या किफायती गैस नहीं मिलती, तो यूरिया उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे कृषि लागत बढ़ने और खाद्यान्न कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। इसी तरह कपड़ा उद्योग और अन्य विनिर्माण इकाइयों के लिए महंगी ऊर्जा उत्पादन लागत बढ़ाती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना कठिन हो सकता है।
पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था के सामने गैस की चोरी, वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता, पुराना बुनियादी ढांचा, घरेलू उत्पादन में गिरावट और आयात पर निर्भरता जैसी चुनौतियां भी हैं। यदि इन समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान नहीं निकाला गया, तो आपूर्ति में थोड़ी-सी बाधा भी कीमतों में तेज उछाल और घरेलू संकट का कारण बन सकती है। वहीं, कीमतों को वास्तविक लागत से कम रखने की नीति यदि बिना लक्षित सहायता के अपनाई जाती है, तो सरकारी वित्त पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
मौजूदा परिस्थितियों में पाकिस्तान के लिए तत्काल चुनौती घरेलू उपभोक्ताओं तक ईंधन की नियमित आपूर्ति बहाल करना और बाजार में कीमतों पर नियंत्रण रखना है। इसके साथ ही गैस वितरण व्यवस्था में सुधार, घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास, वैकल्पिक ऊर्जा को प्रोत्साहन और जरूरतमंद परिवारों तक लक्षित सहायता पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होगा। केवल आयात बढ़ाकर या कीमतों को अस्थायी रूप से नियंत्रित करके इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना मुश्किल है।
पाकिस्तान का गैस संकट इस बात की ओर संकेत करता है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल ईंधन की उपलब्धता का प्रश्न नहीं, बल्कि उत्पादन, आयात, भंडारण, वितरण और आर्थिक नीतियों के बीच संतुलन का विषय भी है। एलपीजी की बढ़ती कीमतें इस व्यापक चुनौती का सबसे प्रत्यक्ष चेहरा हैं, जिसका बोझ अंततः आम नागरिकों को उठाना पड़ता है।



