श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर गूंजे ‘जय मां दुर्गे’ के जयकारे, अजान के सम्मान में रोकी गई शोभायात्रा, कश्मीर में बदलाव की बयार
श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर बंगाली समुदाय ने मां दुर्गा की भव्य शोभायात्रा निकाली। पारंपरिक सिंदूर खेला, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच झेलम नदी में प्रतिमा विसर्जित की गई। अजान के सम्मान में यात्रा रोककर कश्मीरियत और सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश दिया गया।

श्रीनगर,एजेंसी। कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर बंगाली समुदाय ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां दुर्गा को विदाई दी। पांच दिवसीय दुर्गोत्सव के समापन पर निकली विसर्जन शोभायात्रा में ढोल की थाप, पारंपरिक नृत्य और ‘जय मां दुर्गे’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। इस दौरान अजान के समय उसके सम्मान में शोभायात्रा कुछ मिनटों के लिए रोक दी गई। इस दृश्य ने धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और आपसी सद्भाव का संदेश दिया।
ऐतिहासिक लाल चौक स्थित घंटाघर के पास से शुरू हुई शोभायात्रा में बंगाली समुदाय के पुरुषों और महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में हिस्सा लिया। श्रद्धालु ढोल की थाप पर नृत्य करते हुए मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जन के लिए लेकर आगे बढ़े। महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाई और मां दुर्गा से सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान उत्सव और उल्लास का माहौल दिखाई दिया।
शोभायात्रा लाल चौक से आगे बढ़ते हुए अमीरा कदल घाट पहुंची। यहां प्रतिमा विसर्जन से पहले वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया और विधि-विधान से आरती की गई। इसके बाद पारंपरिक विदाई गीतों के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा को झेलम नदी में विसर्जित किया गया। श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर मां दुर्गा के आगमन की कामना के साथ पांच दिवसीय दुर्गोत्सव का समापन किया।
आयोजन के दौरान अजान के समय शोभायात्रा को कुछ देर रोकने का निर्णय विशेष रूप से चर्चा में रहा। धार्मिक गतिविधियों के बीच एक-दूसरे की परंपराओं का सम्मान करने का यह दृश्य आपसी मेलजोल और सह-अस्तित्व की भावना को रेखांकित करता है। कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी ‘कश्मीरियत’ की भावना भी विभिन्न समुदायों के बीच सम्मान और सद्भाव पर जोर देती है।
श्रीनगर के लाल चौक पर दुर्गा विसर्जन का यह आयोजन कश्मीर में रहने वाले बंगाली समुदाय की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक लेकर आया। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को विदाई देते हुए शांति, सुख और समृद्धि की प्रार्थना की।




