पठानकोट में 200 फीट ऊंचे टावर पर 11 दिन से धरना दे रहे दो बुजुर्ग, बारिश में भी मांग पर अड़े
पठानकोट में 82 वर्षीय शरम सिंह और 72 वर्षीय कुलविंदर सिंह 25 अगस्त से 200 फीट ऊंचे टावर पर बैठे हैं। बारिश और तेज हवाओं के बावजूद दोनों नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं।

पठानकोट/पंजाब। पठानकोट में अपनी मांगों को लेकर दो बुजुर्ग पिछले 11 दिनों से करीब 200 फीट ऊंचे टावर पर बैठकर धरना दे रहे हैं। शाहपुर कंडी डैम परियोजना से जुड़े विस्थापित परिवारों के रोजगार की मांग को लेकर 82 वर्षीय शरम सिंह और 72 वर्षीय कुलविंदर सिंह ने 25 अगस्त को टावर पर चढ़कर अपना विरोध शुरू किया था। दोनों बुजुर्ग पठानकोट के डिप्टी कमिश्नर के आवास के पास स्थित टावर पर लगातार डटे हुए हैं। उनका आरोप है कि शाहपुर कंडी डैम परियोजना के निर्माण के लिए उनकी जमीन बेहद कम कीमत पर अधिग्रहित की गई थी और उस समय उनके परिवार के सदस्यों को रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्षों बाद भी यह वादा पूरा नहीं किया गया।
प्रदर्शनकारी बुजुर्गों के मुताबिक, शाहपुर कंडी डैम के लिए उनकी जमीन महज 2,700 रुपये प्रति कनाल की दर से ली गई थी। जमीन अधिग्रहण के समय उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि परियोजना में उनके बच्चों को रोजगार दिया जाएगा। उनका कहना है कि जमीन जाने के बाद परिवार के सामने रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हुआ, लेकिन परियोजना से जुड़े अधिकारियों और प्रशासन की ओर से किया गया रोजगार का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। इसी मांग को लेकर दोनों बुजुर्गों ने टावर पर चढ़कर धरना शुरू किया है।
शरम सिंह और कुलविंदर सिंह का कहना है कि उनका आंदोलन किसी तरह की परेशानी खड़ी करने के लिए नहीं है, बल्कि अपने परिवार के लिए रोजगार का अधिकार हासिल करने की लड़ाई है। उनका कहना है कि जब परियोजना के लिए जमीन ली गई थी, तब जो आश्वासन दिया गया था, उसे पूरा किया जाना चाहिए। दोनों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, वे टावर से नीचे उतरने के लिए तैयार नहीं हैं।
बैराज ओस्टी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दयाल सिंह के मुताबिक, पिछले दो दिनों से इलाके में लगातार भारी बारिश हो रही है। खराब मौसम के बीच करीब 200 फीट की ऊंचाई पर बैठे दोनों बुजुर्गों की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। बारिश और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद दोनों प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। समिति का कहना है कि बुजुर्गों की उम्र और लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए प्रशासन को मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
फोन पर बातचीत में कुलविंदर सिंह ने बताया कि बार-बार हो रही बारिश का उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हर दूसरे दिन बारिश हो रही है और इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं। इसके बावजूद उनका कहना है कि अपनी मांग को प्रशासन तक मजबूती से पहुंचाने के लिए उनके पास आंदोलन जारी रखने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। दोनों प्रदर्शनकारी कठिन परिस्थितियों के बीच भी टावर पर डटे हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों की स्थिति को देखते हुए उन्हें दिन में दो बार भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, बारिश और ऊंचाई पर लगातार बने रहने की वजह से उनके सामने मौसम की चुनौती लगातार बनी हुई है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि दोनों बुजुर्गों की उम्र अधिक होने के कारण उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी की आवश्यकता है।
बैराज ओस्टी संघर्ष समिति ने प्रशासन से दोनों बुजुर्गों की मांग पर गंभीरता से विचार करने और मामले का जल्द समाधान निकालने की अपील की है। समिति का कहना है कि परियोजना के लिए जमीन देने वाले परिवारों को किए गए रोजगार संबंधी वादों और उनकी वर्तमान स्थिति पर प्रशासन को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
करीब 200 फीट ऊंचे टावर पर लगातार 11 दिनों से चल रहा यह धरना अब प्रशासन के सामने भी चुनौती बन गया है। एक ओर बुजुर्ग प्रदर्शनकारियों की मांग रोजगार के वादे को पूरा करने से जुड़ी है, वहीं दूसरी ओर उनकी उम्र और खराब मौसम को देखते हुए उनकी सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। अब देखना होगा कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर इस मामले का क्या समाधान निकालता है और दोनों बुजुर्गों को सुरक्षित रूप से टावर से नीचे उतारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




