आजमगढ़ में मतांतरण के आरोप में पादरी समेत कई लोग हिरासत में, महंत शिव सागर भारती के हस्तक्षेप पर हुई कार्रवाई
आजमगढ़ के नरहन खास गांव में मतांतरण के आरोप में पादरी सोनू कुमार सहित कई महिलाओं और पुरुषों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, जहां झाड़-फूंक के नाम पर प्रलोभन देकर लोगों को मतांतरित करने का प्रयास किया जा रहा था।

आजमगढ़/उत्तर प्रदेश। जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के नरहन खास गांव में रविवार को कथित मतांतरण के आरोप को लेकर हंगामा हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गोहना निवासी पादरी सोनू कुमार समेत आधा दर्जन से अधिक महिलाओं और तीन पुरुषों को हिरासत में लिया। पुलिस सभी से पूछताछ कर मामले की जांच में जुटी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव में झाड़-फूंक और पूजा-पाठ के नाम पर लोगों को एकत्र किया गया था। आरोप है कि इस दौरान लोगों को कथित रूप से प्रलोभन देकर मतांतरण के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा था। मौके पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुषों के मौजूद होने की बात कही गई है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद 50 से अधिक बजरंग दल कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। उनके साथ रजादेपुर सन्यासी मठ के महंत शिवसागर भारती भी पहुंचे। मौके पर मौजूद लोगों और बजरंग दल कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। महंत शिवसागर भारती के हस्तक्षेप के बाद सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और पादरी सहित कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
हिरासत में ली गई महिलाओं में कुछ के मऊ सहित अन्य जिलों की निवासी होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस सभी संदिग्धों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मौके पर किस उद्देश्य से लोगों को एकत्र किया गया था और क्या वास्तव में किसी प्रकार के मतांतरण का प्रयास किया जा रहा था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने मौके की स्थिति को देखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए हैं।
वहीं, रजादेपुर सन्यासी मठ के महंत शिवसागर भारती ने कहा कि सनातन धर्म के लोगों का मतांतरण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गांव में आयोजित कार्यक्रम का वास्तविक उद्देश्य क्या था और लगाए गए मतांतरण के आरोपों में कितनी सच्चाई है।




