दिल्ली की सराय काले खां चौकी पुलिस पर वसूली और आरोपी बदलने का आरोप, विजिलेंस जांच शुरू
दिल्ली पुलिस की सराय काले खां चौकी पर ₹18 लाख की रिश्वत लेकर असली आरोपी को बदलने और एक बेगुनाह को जेल भेजने का गंभीर आरोप लगा है।

नई दिल्ली। सनलाइट कॉलोनी थाने की सराय काले खां चौकी पुलिस पर लाखों रुपये की वसूली कर फोन चोरी सिंडिकेट के मामले में आरोपी बदलने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित ने इस संबंध में दिल्ली के उपराज्यपाल, पुलिस कमिश्नर और मानवाधिकार आयोग सहित उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर चौकी इंचार्ज समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार 19 अप्रैल 2026 को दर्ज आईफोन-17 प्रो छीनने के मामले में पुलिस ने शोएब और समीर को गिरफ्तार किया था। 9 मई को पुलिस उन्हें लेकर दरियागंज स्थित एक मकान पहुंची, जहां से 70-80 चोरी के मोबाइल फोन बरामद होने का दावा है। आरोप है कि घर मालिक की गैरमौजूदगी में उसके पिता को चौकी लाकर लाखों रुपये लेकर छोड़ दिया गया और बाद में असली आरोपी की जगह दूसरे व्यक्ति को फर्जी तौर पर केस में शामिल कर जेल भेज दिया गया।
पीड़ित का यह भी आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने फोन खरीदने वाले एक अन्य व्यक्ति को चोरी का माल बताकर धमकाया, उसके घर से फोन जब्त किए और उसके पिता को हिरासत में लेकर अदालत से रिमांड हासिल किया। परिवार का कहना है कि पुलिस ने 30 लाख रुपये की मांग की और डर के कारण उन्होंने किश्तों में 18 लाख रुपये तक दे दिए।
मामले में नया मोड़ तब आया जब 24 मई 2026 को हिरासत में लिए गए व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि यह मौत पुलिस की प्रताड़ना और मानसिक दबाव का नतीजा है। साथ ही घर में घुसकर सीसीटीवी और डीवीआर तोड़ने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उसके पास पुलिसकर्मियों की कथित अवैध गतिविधियों से जुड़े ऑडियो सबूत मौजूद हैं। उसने चौकी इंचार्ज एसआई धनंजय दुबे, एसआई दीपक, हेड कॉन्स्टेबल वीरेंद्र सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित पक्ष के वकील का कहना है कि आरोपी पुलिसकर्मी समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं, लेकिन वे न्यायिक कार्रवाई करेंगे।
वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ता खुद भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है और मोबाइल चोरी गिरोह से जुड़ा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी बदलने के आरोप की जांच विजिलेंस को सौंपी गई है, जबकि मोबाइल चोरी सिंडिकेट की जांच डीआईयू यूनिट को दी गई है।




