पुणे जहरीली शराब कांड में पुलिस और आबकारी कर्मियों पर गिरी गाज, 22 निलंबित
पुणे में जहरीली शराब कांड के बाद 22 पुलिस और आबकारी अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जिसमें अब तक 19 लोगों की मौत की खबर है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर CID जांच शुरू हो गई है और मुख्य सप्लायर सहित 8 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।

मुंबई/एजेंसी। महाराष्ट्र के पुणे में हुए जहरीली शराब कांड के बाद शासन और प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में पुलिस और राज्य आबकारी विभाग के करीब 22 अधिकारियों-कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिरी है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 19 लोगों के मारे जाने की बात सामने आ रही है। लेकिन प्रशासन सिर्फ नौ लोगों के मरने की पुष्टि कर रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिसके फलस्वरूप हड़पसर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय मोगले, सहायक निरीक्षक हसीना सिकलगर, क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम के सब इंस्पेक्टर हसन मुलानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इसी प्रकार सबसे ज्यादा मौतों वाले पिंपरी-चिंचवड़ में दापोड़ी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर विजय वाघमारे सहित कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में आबकारी विभाग ने भी लापरवाही बरतने के आरोप में अपने 13 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। दूसरी ओर इस मामले की जांच अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) को सौंप दी है, जिसने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमों ने अब तक मुख्य साजिशकर्ताओं समेत आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इस बीच, पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। ठाणे के भिवंडी से जहरीले मीथेनॉल की अवैध आपूर्ति करने वाले मुख्य सप्लायर को भी दबोच लिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस शराब में मीथेनॉल का मिश्रण पाया गया है, जो एक औद्योगिक रसायन है और मानव उपभोग के लिए अत्यंत घातक होता है। इस पदार्थ के सेवन से शरीर के आंतरिक अंगों को अपूरणीय क्षति पहुंचती है।
जांच एजेंसियां अब इस पूरे राज्यव्यापी तंत्र को उजागर करने में जुटी हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। सरकार ने इस पूरे आपराधिक तंत्र को जड़ से समाप्त करने और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं।




