जम्मू-कश्मीर में रेलवे स्टेशन अब नो-शूट ज़ोन, बिना पीआरओ अनुमति के वीडियो-रील बनाई तो होगी कानूनी कार्रवाई

जम्मू रेलवे डिवीजन ने रेलवे परिसरों में बिना अनुमति वीडियोग्राफी और फिल्मांकन पर सख्त प्रतिबंध लगाया है। यह कदम जम्मू-कश्मीर रेल सेक्शन की सुरक्षा संवेदनशीलता को देखते हुए उठाया गया है, जिसमें चेनाब रेल पुल जैसे महत्वपूर्ण स्थल शामिल हैं।

जम्मू/एजेंसी। जम्मू रेलवे डिवीजन ने रेलवे परिसरों और संवेदनशील सुरक्षा स्थलों पर बिना अनुमति वीडियोग्राफी एवं फिल्मांकन को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में रेलवे ढांचा सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए किसी भी समाचार पोर्टल, यूट्यूबर अथवा अन्य व्यक्ति द्वारा बिना पूर्व अनुमति के शूटिंग, वीडियो रिकार्डिंग या फिल्मांकन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार हाल के समय में रेलवे स्टेशनों, ट्रैक, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण परिसरों में सोशल मीडिया कंटेंट और समाचार कवरेज के नाम पर बिना अनुमति वीडियो बनाने की घटनाएं सामने आई थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए जम्मू रेलवे डिवीजन ने मीडिया संस्थानों और आम लोगों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
एडवाइजरी में कहा गया है कि रेलवे परिसरों में किसी भी प्रकार की मीडिया कवरेज, डाक्यूमेंट्री शूट, इंटरव्यू रिकार्डिंग, रील निर्माण अथवा अन्य फिल्मांकन गतिविधियों के लिए पहले रेलवे प्रशासन से औपचारिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए संबंधित व्यक्ति या संस्थान को जम्मू रेलवे डिवीजन के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) कार्यालय से पूर्व स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।
रेलवे प्रशासन ने कहा कि रेलवे नेटवर्क राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण ढांचा है। ऐसे में अनधिकृत वीडियोग्राफी से सुरक्षा संबंधी सूचनाएं सार्वजनिक होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे संचालन प्रभावित होने की आशंका भी रहती है।
अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। रेलवे डिवीजन ने सभी समाचार पोर्टलों, फ्रीलांस पत्रकारों, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और आम नागरिकों से अपील की है कि वे रेलवे परिसरों में किसी भी प्रकार की शूटिंग करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति अवश्य लें। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुमति मिलने के बाद ही निर्धारित शर्तों के अनुसार फिल्मांकन की अनुमति दी जाएगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य मीडिया की गतिविधियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि रेलवे परिसरों की सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की गोपनीयता बनाए रखना है।
जम्मू-श्रीनगर रेल सेक्शन देश की सबसे चुनौतीपूर्ण और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में शामिल है। यह रेल मार्ग पर्वतीय क्षेत्रों, लंबी सुरंगों और ऊंचे पुलों से होकर गुजरता है, जिसके चलते इसे सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। विशेष रूप से चिनाब रेल पुल, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है, सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में रहता है।
इसके अलावा रियासी, कटड़ा, बनिहाल और संगलदान क्षेत्र की प्रमुख सुरंगें तथा रेलवे ट्रैक भी संवेदनशील श्रेणी में आते हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन क्षेत्रों में अनधिकृत वीडियोग्राफी या ड्रोन शूटिंग से सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक होने का खतरा रहता है। यही कारण है कि रेलवे प्रशासन ने बिना अनुमति फिल्मांकन पर सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार रेलवे परिसरों और प्रमुख ढांचों की निगरानी कर रही हैं।

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