साल्ट लेक स्टेडियम में लगा ममता बनर्जी का डिजाइन किया स्टैच्यू हटाएगी बंगाल सरकार
मोहन बागान सुपर जायंट और ईस्ट बंगाल के बीच होने वाले कोलकाता डर्बी से एक दिन पहले ISL का टाइटल तय करने वाला मैच होगा। यहां ममता बनर्जी सरकार के समय विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (सॉल्ट लेक स्टेडियम) के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए 'बिस्वा बांग्ला' लोगो को हटाकर उसकी जगह राष्ट्रीय प्रतीक 'अशोक स्तंभ' (अशोक की लाट) लगा दिया गया।

कोलकाता/एजेंसी। बंगाल में बीजेपी की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने ममता बनर्जी सरकार के कई फैसलों को पलट दिया। अब कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में ममता बनर्जी के डिजाइन किए गए स्टैच्यू को भी हटाया जाएगा। जो स्टैच्यू यहां लगा था, उसे भद्दा बताते हुए हटाने को कहा गया है। इससे पहले ममता का बनाया गया लोगो लहटाकर उसकी जगह यहां अशोक की लॉट वाला लोगो लगाया गया था। इधर लोगो हटाए जाने के बाद इंडियन सुपर लीग की तनावपूर्ण और जज़्बातों से भरी कोलकाता डर्बी खेली गई। यह एक कांटे का मुकाबला था, जिसमें कई मौके गंवाए गए, ज़ोरदार टैकल हुए और आखिर में ज़बरदस्त ड्रामा देखने को मिला।
मैच के 85वें मिनट में ईस्ट बंगाल ने तब बढ़त बनाई, जब सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी एडमंड लालरिंदिका ने गोल दाग दिया। लेकिन कुछ ही पलों बाद मोहन बागान ने पलटवार किया। उनके अपने ‘सुपर-सब’ जेसन कमिंग्स ने एक कॉर्नर किक पर हेडर से गोल करके ईस्ट बंगाल को एक यादगार जीत से महरूम कर दिया।
हालांकि, मैच के बाद जो हुआ, वह सुर्खियों में छा गया। पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि सॉल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी प्रतिमा को हटा दिया जाएगा। यह मूर्ति सॉल्ट लेक स्टेडियम के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने लगाई गई थी, जिसकी परिकल्पना और डिजाइन पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तैयार किया था। इस मूर्ति को 2017 में FIFA U-17 विश्व कप से पहले नवीनीकरण के चरण के दौरान स्टेडियम के वीवीआईपी गेट के बाहर स्थापित किया गया था। ममता बनर्जी ने व्यक्तिगत रूप से इस संरचना की परिकल्पना की थी, जिसमें फुटबॉल खेलते हुए विशाल पैर ‘बिस्वा बांग्ला’ लोगो की ओर ऊपर उठते हुए दिखाए गए हैं, और फुटबॉल पर जयी शब्द लिखा हुआ है।
हालांकि, जिस क्षण इसका अनावरण किया गया, तभी से कोलकाता भर के फुटबॉल समर्थकों के बीच इस स्थापना को लेकर राय बंट गई; कई लोगों ने इसके प्रतीकात्मक अर्थ और दृश्य डिजाइन, दोनों पर ही सवाल उठाए। डर्बी मैच के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, प्रमाणिक ने इस संरचना की कड़ी आलोचना की और पुष्टि की कि सरकार इसे बदलने की योजना बना रही है।
निशिथ प्रमाणिक ने कहा कि इतनी भद्दी दिखने वाली मूर्ति- दो टागें और उनके बीच एक फुटबॉल का कोई मतलब नहीं बनता। यह देखने में भी सुंदर नहीं लगती, इसलिए हम ऐसी बेतुकी संरचना को यहां नहीं रखेंगे जिसका कोई अर्थ न हो, इसे हटा दिया जाएगा और हम इसकी जगह कुछ और लगाएंगे। मंत्री ने एक राजनीतिक रूप से अहम टिप्पणी करते हुए इस संरचना को पिछली सरकार के पतन से भी जोड़ दिया।
प्रमाणिक ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि इस मूर्ति के स्थापित होने के बाद ही पिछली सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए थे। फिर मेस्सी विवाद हुआ, और सरकार सत्ता से बाहर हो गई। डर्बी मैच के बाद स्टेडियम के बाहर उनकी टिप्पणियां तुरंत चर्चा का विषय बन गईं, और कई समर्थकों ने इस निर्णय का स्वागत किया। कई प्रशंसकों ने तर्क दिया कि दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ियों की मूर्तियां भारत के सबसे ऐतिहासिक फुटबॉल स्थलों में से एक की विरासत का बेहतर प्रतिनिधित्व करेंगी।




