खनिक दिवस पर एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर में भव्य आयोजन, श्रमवीरों का सम्मान और उत्कृष्ट क्षेत्रों को किया गया पुरस्कृत

सुमिता शर्मा,अनूपपुर/मध्य प्रदेश। एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर स्थित ऑडिटोरियम में 1 मई को खनिक दिवस का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन मुख्य अतिथि रहे, जबकि निदेशक मंडल, संचालन समिति, कल्याण मंडल, सुरक्षा समिति, सिस्टा, महिला मंडल सहित विभिन्न श्रम संघों के प्रतिनिधि, अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण, कोल इंडिया कॉर्पोरेट गीत और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। शहीद श्रमवीरों के सम्मान में मौन रखा गया और संकल्प का पठन किया गया। मंचस्थ अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों का पुष्पहार, शाल और श्रीफल से सम्मान किया गया। स्वागत उद्बोधन महाप्रबंधक (उत्पादन) संजीव एम. सिंह ने प्रस्तुत किया और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सनीश चन्द्र ने केंद्रीय कोयला मंत्री का संदेश पढ़ा।
मुख्य अतिथि हरीश दुहन ने कहा कि हमारे श्रमिक राष्ट्र के ऊर्जा प्रहरी हैं। उन्होंने कहा कि एसईसीएल की असली पहचान मशीन या आंकड़े नहीं, बल्कि कामगार, माइनर, सुपरवाइजर, कांट्रेक्ट वर्कर, महिला शक्ति और उनके परिवार हैं।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों और खदानों के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले श्रमवीरों को पुरस्कृत किया गया। दीपका, रायगढ़, कुसमुंडा, जमुना कोतमा, भटगांव, कोरबा, हसदेव, चिरमिरी और बैकुंठपुर क्षेत्रों सहित कई ओपनकास्ट और अंडरग्राउंड माइन्स को परफॉर्मेंस अवार्ड मिले। बेस्ट ऑपरेटर, बेस्ट वर्कर, सीएसआर, क्वालिटी ऑफ लाइफ, एन्वायरमेंट मैनेजमेंट, सेफ्टी एक्सीलेंस, एचआरडी, पब्लिक रिलेशन्स, राजभाषा और इंडस्ट्रियल रिलेशन्स अवार्ड भी प्रदान किए गए। श्रद्धा महिला मंडल को समन्वय पुरस्कार मिला।
निदेशक मंडल द्वारा सर्वोत्कृष्ट खनिक सम्मान से एसईसीएल के प्रथम पुरुष हरीश दुहन को भी सम्मानित किया गया। पूर्व निदेशक आर.एस. सिंह ने कर्मठ कर्मवीरों और नेतृत्व की सराहना करते हुए कंपनी की प्रगति की शुभकामनाएँ दीं। संचालन समिति के प्रतिनिधियों ने श्रमिक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रबंधन के कल्याणकारी कार्यों की प्रशंसा की।
कार्यक्रम का समापन विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरण और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। पूरे आयोजन ने श्रमिकों की मेहनत और त्याग को सम्मानित करते हुए एसईसीएल की गौरवशाली परंपरा को पुनः स्थापित किया।




