जमशेदपुर में ‘चाइनीज चापड़’ का खौफः दो महीनों में 5 हत्याएं और 22 हमले, पुलिस के लिए बनी बड़ी चुनौती

जमशेदपुर शहर में अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब पारंपरिक हथियारों कट्टा और पिस्तौल की जगह ‘चाइनीज चापड़’ ने ले ली है। पिछले दो महीनों में इस धारदार हथियार से 22 हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें 5 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 35 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
जमशेदपुर/झारखंड। जमशेदपुर में हाल के दिनों में ‘चाइनीज चापड़’ का चलन तेजी से बढ़ा है। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो महीनों में पूर्वी सिंहभूम के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चाइनीच चापड़ से वार कर पांच लोगों की हत्या कर दी गई। जबकि चापड़ के हमले में 35 अन्य लोग घायल हो गए।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शहर में चाइनीज चापड़ से हमला करना अपराधियों के बीच एक नया ट्रेंड बन गया है। चिंताजनक बात यह है कि इस खतरनाक हथियार का इस्तेमाल केवल पेशेवर अपराधी ही नहीं, बल्कि युवा वर्ग भी कर रहा है। स्कूल, कॉलेज, पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर छोटी-छोटी बातों पर विवाद के दौरान चापड़ निकालकर हमला करने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
जेएमएम की ओर से एसएसपी को ज्ञापन को सौंपकर चाइनीज चापड़ को खतरनाक हथियार की श्रेणी में शामिल कर इसकी बिक्री, सार्वजनिक इस्तेमाल और शहर में आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। जेएमएम नेताओं ने कहा कि इस हथियार को अपराधी एक सोची-समझी रणनीति के तहत इस्तेमाल कर रहे है। इस हथियार के इस्तेमाल पर होने पर बीएनएस की विभिन्न धाराएं लगाई जाती है, लेकिन वो ज्यादा कठोर नहीं होती है।
विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हैं। शहर के बाजारों में चापड़ आसानी से उपलब्ध है और इसकी कीमत भी कम होती है। इसकी तेज धार कम समय में गंभीर चोट पहुंचाने में सक्षम होती हैय़ साथ ही इसे बैग या कपड़ों में आसानी से छिपाया जा सकता है। इसके अलावा, बंदूक और पिस्तौल की तुलना में इस तरह के धारदार हथियारों पर पुलिस की निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं।
चाइनीज चापड़ की सबसे बड़ी समस्या इसकी अत्यधिक कम कीमत है। यह आसानी से हार्डवेयर की दुकानों, साप्ताहिक बाजारों और सड़क किनारे स्टालों पर 50 से 100 रुपये तक में मिल जाता है। इसके लिए किसी पहचान पत्र या लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती। वहीं अपराधियों की ओर से इसे लूटपाट, छिनतई और आपसी झगड़ों में घातक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सहज उपलब्धता ही इसे असामाजिक तत्वों की पहली पसंद बनाती है।
चाकू या पिस्तौल की तुलना में ‘चाइनीज चापड़’ का उपयोग करना अपराधियों के लिए जोखिम मुक्त है। इसे कैरी करना आसान है और यदि पुलिस पकड़ भी ले, तो इसे सामान्य रसोई के उपकरण का नाम देकर सजा से बचा जा सकता है। इसकी भारी बनावट और बेहद तेज धार से पल भर में गंभीर जख्म दिए जा सकते हैं, जो कई बार जानलेवा साबित होते हैं।
चाइनीज चापड़ का संकट इसलिए भी गहरा है क्योंकि यह पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं है। कानून के अनुसार, धारदार हथियारों की श्रेणी में इसे नियंत्रित करना कठिन है क्योंकि यह घरेलू सामान का हिस्सा है। हालांकि, जिस तरह से इसका इस्तेमाल अपराध में हो रहा है, उसे देखते हुए पुलिस को अब सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे हथियारों को जब्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने पड़ रहे हैं।



