नेत्र दिव्यांगों के लिए एम्स ने बनाया एआई स्मार्ट चश्मा, पढ़ने और चलने में करेगा मदद

नई दिल्ली। एआई स्मार्ट चश्मा नेत्र दिव्यांगों को पढ़ने, चलने और दूसरे अन्य कार्य करने में भी सहयोग करेगा। यह जानकारी सोमवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र ( डॉ. आरपी सेंटर) के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित पत्रकारवार्ता में चिकित्सा विशेषज्ञों ने दी। पत्रकारवार्ता में आरपी सेंटर एम्स के डॉ. आरपी सेंटर के प्रो. प्रदीप वेंकटेश, प्रो. तनुज दादा, प्रो. भावना चावला, प्रो. प्रवीण वशिष्ठ, डॉ. मनप्रीत के अनुसार करीब 35 हजार रुपये की लागत वाला यह स्मार्ट चश्मा कागज या किताब पर लिखे पाठ को स्कैन कर उसे पढ़कर सुना सकता है। एआई आधारित यह उपकरण लिखित सामग्री की पहचान कर उसे आडियो में बदल देता है, जिससे दृष्टिबाधित लोगों को पढ़ने में सहायता मिल सकती है। दावा किया कि यह नेत्र दिव्यांगों के लिए शिक्षा और दैनिक जीवन के कामकाज को अधिक आसान बना सकती है।
एम्स प्रो. प्रदीप वेंकटेश, प्रो. तनुज दादा ने बताया कि रेटिना की तस्वीर के आधार पर आंखों की बीमारी की पहचान करने वाला एआई आधारित ऐप ‘मधुनेत्रएआई’ विकसित किया गया है। इस प्रणाली में विशेष कैमरे से आंख के अंदर की रेटिना की तस्वीर ली जाती है और उसे ऐप में अपलोड किया जाता है। इसके बाद एआई आधारित एल्गोरिद्म उसका विश्लेषण कर यह संकेत देता है कि व्यक्ति में मधुमेह से जुड़ी रेटिना की बीमारी जैसे डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती लक्षण मौजूद हैं या नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे रोग की शुरुआती अवस्था में पहचान संभव हो सकती है और समय रहते उपचार किया जा सकता है। इससे दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र रोगों से संबंधित विशेषज्ञ जांच और उपचार संभव हो सकेगा।
प्रो. भावना चावला ने बताया कि डोनर कॉर्निया को तेजी से अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ड्रोन के उपयोग का सफल परीक्षण किया गया है। इससे दूरस्थ स्थानों से कार्निया को कम समय में अस्पताल तक पहुंचाकर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार नई तकनीकों के उपयोग से नेत्र रोगों की जांच और उपचार को अधिक सुलभ बनाने में मदद मिलेगी।
दिल्ली के 60 लाख लोगों में नेत्र समस्या, चश्मे की आवश्यकता
एम्स प्रो. प्रवीण वशिष्ठ के अनुसार केंद्र के कम्युनिटी ऑप्थल्मोलाजी विभाग ने नेशनल कैपिटल टेरिटरी आफ दिल्ली के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के रिफ्रैक्टिव एरर सिचुएशन एनालिसिस टूल (रीसेट) पर आधारित अध्ययन रिपोर्ट जमा की है।
इस रिपोर्ट में राजधानी में आंखों की देखभाल से जुड़ी सेवाओं, चुनौतियों और जरूरतों का विस्तृत आकलन किया गया है। बताया कि दिल्ली में 60 लाख लोगों को नेत्र दोष के कारण चश्मे की आवश्यकता है। 50 वर्ष से अधिक आयु के करीब 70 प्रतिशत लोगों को साफ देखने के लिए चश्मे की जरूरत पड़ती है।
20 प्रतिशत के करीब बच्चों में भी दृष्टि सुधार के लिए चश्मे की आवश्यकता है। अध्ययन में सामने आया कि दिल्ली में 249 संस्थान नेत्र सेवाएं प्रदान करते हैं, 1085 नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं और 489 के करीब आप्टोमेट्रिस्ट कार्यरत हैं। यह संतोषजक नहीं है। मानकों के अनुसार दिल्ली की आवश्यकता अनुसार इससे अधिक आप्टोमेट्रिस्ट की आवश्यकता है।





