‘मॉकड्रिल’: खाटूश्यामजी में घुसे दो ‘आतंकवादी’,एटीएस ने दबोचा और खोल दिए सारे ‘राज’

सीकर/राजस्थान। विश्व विख्यात खाटूश्यामजी मंदिर में शुक्रवार दोपहर अचानक उस समय कोहराम मच गया, जब हथियारों से लैस कमांडो ने पूरे मंदिर परिसर को चारों तरफ से घेर लिया। मंदिर के पास अचानक बढ़ी हलचल और सुरक्षा एजेंसियों की भागदौड़ देख वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं के हाथ-पांव फूल गए। देखते ही देखते खबर फैल गई कि मंदिर परिसर में खूंखार आतंकवादी छिपे हुए हैं।
एटीएस का धावा और आतंकियों का खात्मा
आतंकवादियों के छिपे होने की खुफिया सूचना मिलते ही राजस्थान पुलिस की आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) ने मोर्चा संभाला। मंदिर के चप्पे-चप्पे पर कमांडो तैनात हो गए। जैसे ही आतंकवादियों ने खुद को घिरा हुआ पाया, उन्होंने छिपने की कोशिश की, लेकिन एटीएस के जांबाज जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए त्वरित कार्रवाई की। दोनों तरफ से हुई इस रणनीतिक घेराबंदी के बाद, एटीएस ने कुछ ही पलों में दोनों आतंकवादियों को मौके पर ही दबोच लिया।
श्रद्धालुओं में मच गई थी अफरा-तफरी
खाटूश्यामजी मंदिर देश-विदेश के लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है, इसलिए इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे। मंदिर में दर्शन के लिए कतारों में लगे श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए भीड़ को नियंत्रित किया और स्थिति को काबू में लिया।
जब सामने आई ‘मॉकड्रिल’ की हकीकत
एटीएस की टीम ने जब अपना ‘ऑपरेशन’ पूरा कर आतंकियों को ढेर किया, तब जाकर प्रशासन ने लाउडस्पीकर के माध्यम से सच्चाई साझा की। दरअसल, यह कोई वास्तविक आतंकी हमला नहीं था, बल्कि एटीएस की ओर से आयोजित एक ‘मॉकड्रिल’ थी। मॉकड्रिल की जानकारी मिलते ही श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन ने राहत की सांस ली। अधिकारियों ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य मंदिर जैसे संवेदनशील स्थानों पर संभावित आतंकी हमलों जैसी आपात स्थितियों में सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता, रिस्पॉन्स टाइम और आपसी समन्वय को परखना था।

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