बरेली का ‘नीरव मोदी’! 300 करोड़ रुपये के भूमि निवेश घोटाले में राजेश मौर्य गिरफ्तार

Bareilly's 'Nirav Modi'! Rajesh Maurya arrested in Rs 300 crore land investment scam

बरेली/उत्तर प्रदेश। बरेली से भूमि निवेश घोटाले के आरोपी की गिरफ्तारी की खबर है। गंगा इंफ्रासिटी परियोजना के निदेशक और बरेली में 300 करोड़ रुपये के भूमि निवेश घोटाले के मुख्य आरोपी रियल एस्टेट कारोबारी राजेश मौर्य को एक साल से अधिक समय तक पुलिस से बचने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। यूपी पुलिस ने उनके खिलाफ पांच वारंट जारी किए थे, जो सभी बारादरी थाने में लंबित थे। अधिकारियों के अनुसार, राजेश मौर्य ने कथित तौर पर भूमि निवेश पर हाई रिटर्न का वादा करके सैकड़ों निवासियों को धोखा दिया। उनकी कंपनी ने कथित तौर पर गायब होने से पहले 300 करोड़ रुपये से अधिक एकत्र किए, जिससे उन्हें ‘बरेली का नीरव मोदी’ नाम मिला।
हालांकि, बरेली पुलिस ने उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया, लेकिन उसने पहले ही रुपये निकाल लिया था। रुपयों को रियल एस्टेट में निवेश कर दिया था। कई शिकायतों और कानूनी मामलों के बावजूद, राजेश मौर्य जमानत हासिल करने में कामयाब रहा। राजेश मौर्य चेक बाउंस मामले में पेश नहीं हुए तो उसके खिलाफ एक गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। इसके बाद भी, उसने अदालत के आदेशों की अनदेखी करना जारी रखा।
निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत मामलों को संभालने वाले विशेष जज हरिहर प्रसाद यादव ने कई गैर जमानती वारंट जारी किए। उन्होंने आखिरकार बरेली एसएसपी को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने बताया कि राजेश मौर्य ने करीब 23 साल पहले अपनी कंपनी शुरू की थी। बरेली के ग्रीन पार्क इलाके के पास एक ऑफिस बनाया था। उसने कथित तौर पर निवेशकों को प्रस्तावित आवासीय टाउनशिप में कृषि भूमि की पेशकश करके लुभाया। उनका पैसा दोगुना करने का वादा किया।
राजेश मौर्य ने विश्वसनीयता बनाने के लिए शुरुआती निवेशकों को उनकी निवेश की गई राशि से दोगुनी राशि के चेक जारी किए। जैसे-जैसे यह योजना लोकप्रिय होती गई, अनिल शाहू, राजीव गुप्ता और संजीव गुप्ता सहित कई स्थानीय व्यापारियों ने भारी निवेश किया। अंत में राजेश मौर्य ने ऑफिस बंद कर दिया और अपने साथियों के साथ भाग गया।
राजेश मौर्य ने अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनी के एजेंटों को उनके लाए गए निवेश के आधार पर मोटरसाइकिल और लग्जरी कारें भी उपहार में दीं। इन प्रोत्साहनों से प्रेरित होकर एजेंटों ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। अधिकारियों ने बताया कि घोटाले का खुलासा होने के बाद कई एजेंटों ने अपने वाहन पुलिस थानों में जमा करा दिए। बारादरी एसएचओ धनंजय कुमार पांडेय ने बताया कि राजेश मौर्य के खिलाफ कई थानों में 12 मामले दर्ज हैं।
बारादरी एसएचओ ने कहा कि राजेश मौर्य कुशीनगर जिले का रहने वाला है और उसके पिता सरकारी ट्यूबवेल ऑपरेटर थे। उसने खरीदारों को पांच साल तक 1 फीसीी मासिक रिटर्न देने का वादा किया। गारंटी के तौर पर पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए। कंपनी ने आखिरकार आसपास के कस्बों और गांवों में करीब 200 शाखाएं खोलीं।
एसएचओ ने बताया कि फ्रैंचाइजी धारकों ने 2 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट मनी का भुगतान किया। 18,000 रुपये मासिक वेतन तक प्राप्त किया। उनके सामने शर्त यह थी कि प्रत्येक शाखा में सालाना कम से कम 25 लाख रुपये का निवेश हो। शुरुआत में रिटर्न का भुगतान किया गया, लेकिन समय के साथ कंपनी ने डिफॉल्ट किया। वादा की गई राशि का केवल 70 फीसदी ही वापस कर पाई। करीब 200 निवेशकों ने घाटे की सूचना दी। कंपनी की ओर से जारी किए गए कई चेक अपर्याप्त धन के कारण बाउंस हो गए।
एसएचओ ने बताया कि मामले में गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही भी शुरू की गई, जिसके परिणामस्वरूप अगस्त 2018 में आरोपी और उनके पूरे परिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। जमानत मिलने के बाद राजेश मौर्य फरार हो गया। आखिरकार, रविवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

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