गोरखपुर में हटाए गए एम्स के डायरेक्टर, बेटे और बेटी को फर्जी तरीके से एडमिशन दिलाने का था आरोप

AIIMS director removed from Gorakhpur, was accused of getting admission for son and daughter through fraudulent means

गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश के बाद गोरखपुर और पटना एम्स का कार्यभार देख रहे प्रोफेसर गोपाल कृष्ण पाल को डायरेक्टर के पद से हटा दिया गया है। पिछले दिनों प्रोफेसर गोपाल कृष्ण पाल पर सर्जरी विभाग के हेड द्वारा आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने अपनी बेटी को फर्जी तरीके से पटना एम्स में ज्वाइन कराया है तो वहीं बेटे को गोरखपुर एम्स में दाखिला दिलाया गया है। एम्स थाने में दी गई तहरीर में लिखा गया था कि प्रोफेसर पाल राजपूत समाज से आते हैं। बावजूद इसके उन्होंने ओबीसी का सर्टिफिकेट बनवाकर बेटे और बेटी का दाखिला कराया था।
प्रोफेसर पाल का कार्यकाल आगामी 2 अक्टूबर को पूरा होना था, लेकिन उसके पहले ही शुक्रवार को उन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आदेश पत्र के बाद पद से हटा दिया गया है। फिलहाल उनके विरुद्ध जांच चल रही है। जल्द ही स्वास्थ्य विभाग की एक टीम भी गोरखपुर आने वाली है, जो इस मामले की जांच करेगी। डॉ. पाल की जगह भोपाल एम्स के डायरेक्टर प्रोफेसर अजय सिंह को 3 महीने के लिए गोरखपुर एम्स का कार्यभार सौंपा गया है। प्रोफेसर कृष्ण गोपाल पाल की पत्नी प्रभाती पाल ने भी डायरेक्टर के पद के लिए लिए अप्लाई किया था, लेकिन साक्षात्कार के लिए उपलब्ध नहीं हुईं। इसको लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
बता दें कि साल 2023 में पूर्व डायरेक्टर सुरेखा किशोर को भी गैर कानूनी तरीके से अपने बेटों को नियुक्ति दिलाने, अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ भी अभी जांच चल रही है। उनकी जगह पटना एम्स से संबंधित डायरेक्टर कृष्ण गोपाल पाल को गोरखपुर एम्स का प्रभार सौंपा गया था। आगामी 2 अक्टूबर को उनका कार्य काल समाप्त होने वाला था, लेकिन इसी बीच सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. गौरव गुप्ता ने उनके खिलाफ एम्स थाने में तहरीर दी थी कि डॉक्टर पाल ने अपनी बेटी को पटना एम्स में नियुक्ति दिलाने और गोरखपुर एम्स में बेटे का एडमिशन दिलाने के लिए ओबीसी का सर्टिफिकेट और आय संबंधित अन्य फर्जी दस्तावेज संलग्न किए हैं। साल भीतर ही दो एम्स डायरेक्टर को भ्रष्टाचार और गलत दस्तावेज प्रस्तुत कर अपने परिजनों को नौकरी दिलाने के मामले में पद से हटाया गया है।

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