इटावा में शादी की रस्मों से पहले दूल्हा-दुल्हन ने किया देहदान

The bride and groom donated their bodies before the wedding rituals in Etawah

  • दूल्हा-दुल्हन ने शादी से पहले देहदान संकल्प लिया
  • इस अनोखे कदम से समाज में प्रेरणा का संचार
  • सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने सराहा

इटावा/उत्तर प्रदेश। इटावा जिले में एक जोड़े ने अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए अनोखा कदम उठाया। जयमाला और फेरों से पहले, दूल्हे अतुल और दुल्हन लवी ने मानवता की सेवा का संकल्प लेते हुए देहदान करने का फैसला किया। सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने उन्हें देहदान का सर्टिफिकेट देकर इस नेक पहल को सराहा। माना जा रहा है कि शादी से पहले देहदान करने वाले वे देश के पहले दूल्हा-दुल्ह हैं, जिन्होंने मेडिकल साइंस और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को इस तरह परिभाषित किया।
अतुल (एमबीए) और लवी (बीएससी) ने न केवल अपने जीवन को एक साथ जोड़ने का फैसला किया, बल्कि मृत्यु के बाद भी चिकित्सा शिक्षा और शोध में योगदान देने का संकल्प लिया। दोनों का यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है, जो दिखाता है कि प्यार और विवाह का मतलब सिर्फ खुशियां बांटना ही नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के लिए भी प्रतिबद्ध होना है।
शादी की रश्मों के बीच जब सब आंखें दूल्हा-दुल्हन पर टिकी थीं, उसी वक्त अतुल और लवी ने देहदान और अंगदान का फॉर्म भरकर समाज के नाम अपना शरीर समर्पित कर दिया। सैफई पीजीआई से आए एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. नित्यानंद की मौजूदगी में औपचारिकताएं पूरी की गईं।
इटावा सैफई पीजीआई में कार्यरत अतुल यादव को कानपुर स्थित ‘युग दधीचि देहदान संस्था’ से प्रेरणा मिली। संस्था के संचालक मनोज सेंगर और माधवी सेंगर वर्ष 2003 से यह अभियान चला रहे हैं। इस पहल को तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री का मार्गदर्शन भी मिला था। दूल्हा अतुल यादव भरथना के खानपुरा पोस्ट कुसना निवासी है। दुल्हन लवी महेवा के नोगवां निवाड़ी कला निवासी है। दोनों ने शादी से पहले ही यह निर्णय ले लिया था। दोनों परिवारों ने भी इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया। अतुल नेकहा, मेरी इच्छा है, मेरी मृत्यु के बाद भी मेरा शरीर किसी के काम आए। अगर मेरे अंगों से किसी की जान बच सकती है, तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं।
शादी महेवा के एक निजी गेस्ट हाउस में हुई, जहां बारातियों के साथ-साथ सैफई मेडिकल कॉलेज और युग दधीचि संस्था के प्रतिनिधि भी विशेष रूप से आमंत्रित किए गए थे। देहदान की कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही सभी ने नवविवाहित जोड़े को तालियों से सम्मानित किया। अब तक युग दधीचि संस्था के माध्यम से प्रदेश के दर्जनों राजकीय मेडिकल कॉलेजों को 298 शव मेडिकल शोध के लिए दान किए जा चुके हैं, जबकि 4,000 से अधिक लोग देहदान का संकल्प ले चुके हैं।

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