नोएडा में ऑनलाइन हॉलिडे टूर पैकेज बुक करने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले गैंग का खुलासा, 32 गिरफ्तार

Gang involved in fraud in the name of booking online holiday tour packages busted in Noida, 32 arrested

  • टरनेट पर होलिडे सर्च करने वालों का डेटा उठा रहे थे आरोपी
  • कई शिकायतें सामने आने के बाद पुलिस ने की है कार्रवाई
  • कंट्री होलिडे ट्रेवल इंडिया के 32 लोगों को किया गया अरेस्ट

नोएडा। उत्तर प्रदेश के होलिडे पैकेज के बहाने ठगी करने वाले गैंग का पर्दाफाश हुआ है। अगर आपको होलिडे पैकेज के लिए अनजान नंबर से कॉल आए और बेहतर ऑफर दे तो अलर्ट हो जाएं। क्योंकि, ठग बेहतर ऑफर का लालच देकर धोखाधड़ी कर रहे हैं। ऐसा ही खुलासा सेक्टर-63 पुलिस ने किया है। गौतमबुद्धनगर में करीब 2 साल से चल रही होलिडे कंपनी पर पुलिस ने कार्रवाई की है। डीसीपी सेंट्रल शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि इस मामले में कंट्री होलिडे ट्रेवल इंडिया के 2 एजीएम रवनीत और अजय समेत 32 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 17 लड़कियां भी शामिल हैं।कंपनी सेक्टर-63 में ही 2 ऑफिस से होलिडे पैकेज के नाम पर लोगों से ठग कर रही थी। इस तरह की पुलिस को 7 शिकायतें मिली थीं। दो लोगों ने ऑनलाइन तरीके से जानकारी दी थी। बेंगलुरु पुलिस ने आरोपियों के 2 अकाउंट भी फ्रीज करवाए। इसकी सूचना के बाद टीम को जांच में लगाया गया था। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके पास से कई लैपटॉप, मोबाइल और लोगों का डेटा मिला है।
5 स्टार होटल में लंच या डिनर का झांसा
पुलिस ने बताया कि कंपनी डार्क वेब से ऐसे लोगों का डेटा लेती थी, जो इंटरनेट पर किसी भी जगह के होलिडे प्लान के लिए सर्च करते थे। डेटा मिलने के बाद कॉलिंग टीम को उसे दिया जाता था। कॉलर दूसरी नामी कंपनियों से कम दाम में पैकेज ऑफर करता था। पैकेज के लिए तैयार होने पर आरोपी अपने एक प्रतिनिधि को उनके घर तक भेजते। पूरी डिटेल देने के साथ रुपये भी वहीं कलेक्ट करते थे। वहीं, कुछ मामलों में कंपनी किसी 5 स्टार होटल में लंच या डिनर रखकर अपने प्लान बेचा करती थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कंपनी को मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर में रजिस्टर्ड भी करवाया था। डीसीपी ने बताया कि अभी कंपनी के डायरेक्टर विशाल, सेल्स हेड आकाश, एडमिन दीपक, सेल्स टीम ज्योति और श्रेयस फरार हैं। उनकी तलाश में टीम को लगाया गया है।
डीसीपी ने बताया कि कंपनी लोगों को टारगेट करने के बाद 2 टीम के साथ काम करती। पहली टीम लोगों को पैकेज बेचती, जिसमें 50 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के पैकेज दिए जाते। ये पैकेज देशभर के लिए होते। आरोपी नामी होटल और एजेंसी से टाइअप के बारे में जानकारी देते। एक बार पैकेज लेने के बाद जब कोई पीड़ित अपनी लोकेशन पर पहुंचता है तो वहां उसे जानकारी होती कि उनके नाम की कोई बुकिंग ही नहीं है, जिसके बाद टेक टीम काम करती।
वह पहले लोगों को तकनीकी कमी के साथ दिक्कत होने की जानकारी देकर दूसरा होटल बुक करने के लिए कहते। वहीं, जो लोग रिफंड के बारे में बात करते तो उन्हें कंपनी की कई पॉलिसी बताकर बाद में नंबर को ब्लॉक कर दिया जाता। अभी तक की जांच में दिल्ली-एनसीआर से बाहर के लोगों को ठगने की बात सामने आई है। एक पुलिस टीम पूरे डेटा की जांच कर रही है।
गिरफ्तार हुए लोगों में रवनीत, प्रत्सुस, शुभांकर, मनोज, दीपक, योगेश, हर्षित, आदिल, कौशल, पुष्पेंद्र, सिद्धार्थ, रंजीत, मनोज कुमार, अजय किशोर, अभिषेक, अंकिता, निकिता, राधा वर्मा, अंजलि, निशा, साजिमा, गुंजन, स्वेता, भावना, महक, नीलिका, विनीता, प्राची, हिमांशी, नीलम, आकांक्षा और कंचन को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपी 12वीं से लेकर मैनेजमेंट कोर्स की पढ़ाई के बाद ठगी करने करने वाली कंपनी में काम कर रहे थे।
इंटरनेट पर अक्सर कुछ सर्च के बाद उससे जुड़े ऐड लोगों को दिखते हैं या फिर उनसे जुड़ी कंपनी की कॉल आती हैं। यह लोगों के लिए हैरान करने वाला होता है। सेक्टर-63 में चल रही कंपनी पर कार्रवाई के बाद पुलिस को उनके पास से 10 हजार से अधिक लोगों का डेटा मिला है। डीसीपी सेंट्रल शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि कंपनी अपनी टेक टीम की मदद से लोगों का डेटा ले रही थी। वह हर बार 12-14 हजार लोगों का डेटा लेते थे, जिस पर कॉल कर संपर्क किया जाता था।
डीसीपी ने बताया कि यह डेटा उन सभी लोगों का होता है, जो इंटरनेट पर विभिन्न सर्च इंजन पर हॉलिडे सर्च कर रहे होते हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि डार्क वेब पर बल्क में लोगों का डेटा बेचा जाता है। यह अलग-अलग कैटिगरी का होता है, जिसमें लोग अपनी पसंद के हिसाब से लोगों का डेटा लेते हैं।
डीसीपी ने कहा कि कंपनी के कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में सामने आया है कि गैंग 1 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से डेटा लेता था। आरोपी आउटसोर्स लोगों की मदद से विभिन्न मॉल और दूसरे स्थानों पर स्टॉल लगाने के बाद लकी ड्रॉ के नाम पर भी लोगों का डेटा लेते थे। इन 2 तरीके से लोगों की पूरी प्रोफाइल के बारे में आरोपी जानकारी करते हैं।

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