कानपुर के बलवंत हत्याकांड में तत्कालीन शिवली कोतवाल और मैथा चौकी इंचार्ज दोषी, कोर्ट ने भेजा जेल

The then Shivli Kotwal and Maitha Chowki incharge were found guilty in Balwant murder case of Kanpur, court sent them to jail

 

कानपुर देहात/उत्तर प्रदेश। जिले के चर्चित बलवंत हत्याकांड में शनिवार को फैसला आ गया। हत्यारोपी एसओजी टीम दोषमुक्त हो गई है, जबकि शिवली के तत्कालीन कोतवाल और मैथा चौकी इंचार्ज को आईपीसी 304 (भाग दो) के तहत दोषी साबित किया गया है। इन दोनों को 24 अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी। दोनों जमानत पर बाहर थे। कोर्ट ने इन्हें जेल भेज दिया है।शिवली कोतवाली के सरैयां लालपुर गांव के रहने वाले व्यापारी बलवंत सिंह की रनिया थाने में 12 दिसंबर को पुलिस की पिटाई से मौत हो गई थी। मृतक का शरीर पूरी तरह से काला पड़ा था। पोस्टमार्टम में 30 से अधिक चोटें पाई गई थीं। मृतक के चाचा अंगद सिंह ने पुलिस पर पिटाई का आरोप लगाकर एसओजी प्रभारी प्रशांत गौतम और उनकी टीम, मैथा चौकी इंचार्ज ज्ञान प्रकाश पांडेय, शिवली कोतवाल राजेश सिंह समेत आठ लोगों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामला बेहद चर्चित रहा था। हाईकोर्ट के निर्देश पर इस प्रकरण की डे बाई डे सुनवाई हो रही थी।
शनिवार को एडीजे पंचम पूनम सिंह की कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसमें एसओजी पूरी टीम दोषमुक्त साबित हुई। वहीं शिवली के तत्कालीन कोतवाल राजेश सिंह और मैथा चौकी इंचार्ज ज्ञान प्रकाश पांडेय को आईपीसी की धारा 304 (भाग 2) के तहत दोषी पाया गया। सजा का ऐलान 24 अक्टूबर को सुनाई जाएगी। एडीजीसी संतोष कटियार ने बताया कि इस प्रकरण में दो लोग दोषी साबित हुए हैं। अन्य को दोषमुक्त कर दिया गया है। वादी के अधिवक्ता जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 (भाग 2) के तहत अगर कोई व्यक्ति ऐसे काम को जानबूझ कर करता है, जिससे मृत्यु हो सकती है, लेकिन उसका मकसद मृत्यु करना नहीं था। ऐसे मामले में आरोपी के दोषी साबित होने पर दस साल तक की सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है।
6 दिसंबर को शिवली के सरैंया गांव निवासी दुकानदार चंद्रभान सिंह के साथ लूट हुई थी। वह दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, उनके पास बैग में ढाई लाख रुपये थे। चंद्रभान रिश्ते में बलवंत के चाचा हैं। लूट के खुलासे के लिए पुलिस ने कई लोगों को उठाया था। शक के आधार पर रनियां में एक फैक्टरी के बाहर से पुलिस ने बलवंत को पकड़ा था। वह चूनी चोकर का कारोबारी था। लोडर चालक के साथ फैक्टरी में माल लेने गया था। पुलिस ने उसे और चालक को उठाया तो पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई थी। परिजनों का आरोप था कि पुलिस ने चार घंटे रनियां थाने में रखकर बलवंत के साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दी।
घटना के दौरान जिले की एसपी सुनीति थीं। पुलिस कस्टडी में मौत होने से सपा समेत अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिले में सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि भी पुलिस से खासे नाराज थे। सरकार ने एसपी सुनीति को तत्काल जिले से हटाकर पीएसी में भेज दिया था।
इस घटना में नामजद आरोपी तत्कालीन एसओजी प्रभारी प्रशांत गौतम, शिवली कोतवाल राजेश सिंह, मैथा चौकी इंचार्ज ज्ञान प्रकाश पांडेय, कांस्टेबिल विनोद कुमार लंबे समय तक जेल में रहने के बाद इस समय जमानत पर बाहर थे। वहीं एसओजी के सिपाही प्रशांत पांडेय, दुर्वेश, सोनू यादव और अनूप समेत चार लोग जेल में थे। शनिवार को ज्ञान प्रकाश पांडेय और राजेश सिंह को फिर से जेल भेज दिया गया। दोषमुक्त किए गए लोगों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
घटना की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। मामले में गैर इरादतन हत्या में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी। इसमें शिवली कोतवाल राजेश सिंह, चौकी इंचार्ज ज्ञान प्रकाश पांडेय, एसओजी प्रभारी प्रशांत गौतम, मुख्य आरक्षी दुर्वेश कुमार, आरक्षी सोनू यादव, अनूप कुमार, प्रशांत कुमार पांडेय, विनोद कुमार समेत आठ के नाम आरोप पत्र में शामिल थे। कुल 36 गवाह बनाए गए थे। मामले में 300 पन्नों से अधिक का आरोप पत्र प्रेषित किया गया था।

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