दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने सात राज्यों में छापेमारी कर 19 साइबर अपराधी दबोचे

विदेश में बैठे मास्टरमाइंड के इशारे पर करते थे ठगी

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली ब्यूरो। साइबर फ्राड के कई मामलों को देखते हुए दक्षिणी पश्चिम जिले की साइबर टीम ने अभियान छेड़ते हुए 19 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। टीम ने सात दिन तक सात राज्यों में छापेमारी कर आरोपितों को पकड़ा है। स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने के साथ ही आरोपित वर्क फ्राम होम, ड्राइवर ट्रक प्लस कार्ड, 99 एकड़ व क्विकर एप के जरिए लोगों की गाढ़ी कमाई एक झटके में उड़ा देते थे। पुलिस को इनके पास से 42 मोबाइल फोन, 21 सिम, 6 एटीएम और 2 फर्जी आधार बरामद हुए।
दक्षिणी पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त रोहित मीना ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थान, झारखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व कर्नाटक से गिरफ्तार आरोपित छह तरह से ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। इनमें ड्राइवर ट्रक प्लस कार्ड, 99 एकड़ व क्विकर एप, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन जॉब, शेयर मार्केट में निवेश और सोशल मीडिया पर दोस्ती के बहाने लोगों के साथ धोखाधड़ी करते थे।
इनके खातों से 6.93 करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इनके खातों में करीब 35 लाख रुपये फ्रीज भी कराए हैं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज 148 मामलों में इनकी संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं, जिनमें से सात का सुलझा भी लिया गया है।
कांता प्रसाद कारपेंटर निवासी वरको सिटी कालोनी-ब्योरा, सचिन पाठक निवासी सिहोर, संजय कुंभकर निवासी राजगढ़, मुकेश डांगी निवासी राजगढ़, मध्य प्रदेश, संतोष कुमार निवासी समस्तीपुर-बिहार, अरुण कुमार मंडल, नारायण कुमार मंडल व रमेश कुमार मंडल निवासी गिरीडीह-झारखंड, आनंद मंडल निवासी जामतारा-झारखंड।
विदेश में बैठे सरगना के इशारे पर चल रहा गिरोह
एनसीआरपी पर 21 फरवरी 2024 को एक पीड़ित ने शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर 18 लाख की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की। टीम ने जांच शुरू की। पैसों का लेनदेन किन खाते में हुआ, उसका पता लगाने के साथ ही तकनीकि साक्ष्य जुटाए गए। जांच में पता चला कि ठगी गई राशि तीन अलग-अलग बैंक खातों में जमा की गई। कुल 18 में से चार लाख रुपये दीपू व मोहम्मद अली निवासी अंजना पुरा, बेंगलुरु के फेडरल बैंक खाते में जमा हुए थे। उन्हें गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान, यह पता चला कि उन्होंने 9 चालू बैंक खाते खोले थे, यानी फेडरल बैंक में तीन बैंक खाते, एसबीआई में तीन बैंक खाते और आरबीएल में तीन बैंक खाते। जालसाजों को इसके जरिए रकम ट्रांसफर की। इनमें से एक आरोपित चेतन नायडू कमीशन के आधार पर टेलीग्राम के माध्यम से इनसे जुड़ा था। उन्हें कमीशन के रूप में 1.10 लाख रुपये मिले।
फ्लैशस्टेप टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड के फेडरल बैंक खाते के विश्लेषण से पता चला कि कथित खाते में लगभग 3.27 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। एनसीआरपी पोर्टल पर खोज करने पर इस खाते से जुड़ी कुल 40 एनसीआरपी शिकायतें मिलीं। गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए मुंबई में उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। टीम ने आरोपित चेतन नायडू को गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि वह जालसाजों के संपर्क में है, जो विदेश में बैठकर गिरोह का संचालन कर रहे हैं। उसने बताया कि वह प्रत्येक खाते में लेनदेन के आधार पर कमीशन लेता है। टेलीग्राम के माध्यम से ही गिरोह के सदस्यों से संवाद होता है।
एनीडेस्क डाउनलोड कराकर उड़ाए थे दो लाख
एनसीआरपी पोर्टल पर 10 अक्टूबर को दर्ज शिकायत के मुताबित पीड़ित ने तीन अक्टूबर को अमेज़न से आर्डर किया। उत्पाद से असंतुष्ट होने पर पार्सल के पैसे वापस पाने के लिए गूगल पर अमेज़न कस्टमर केयर का नंबर सर्च किया। पीड़ित को 10 अक्टूबर को फर्जी अमेज़न कस्टमर केयर से फोन आया।
फोन करने वाले ने रिफंड के लिए उन्हें एनी डेस्क नामक एप्लिकेशन डाउनलोड करने को कहा। इसके बाद उनके खाते से चार बार में 1,99,808 रुपये ठग लिए। जांच में पता चला कि धोखाधड़ी की राशि धीरज कुमार निवासी रायबरेली, यूपी के बैंक खाते में जमा हुई। उक्त खाते में लगभग 25 लाख रुपये का लेनदेन हुआ है।
जानकारी के आधार पर टीम ने छापेमारी कर आरोपित कुंदन कुमार दास को गिरफ्तार कर लिया। कुंदन ने बताया कि उसने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और वह पिछले कुछ वर्षों से ऑनलाइन ठगी कर रहा है। दो साल पहले वह कालीजोत गांव के इरफान के संपर्क में आया जो साइबर ठगी करता है।
इरफान और पिंडारी गांव के उसके दोस्त लोगों को अलग-अलग तरीकों से फोन करते हैं और उन्हें ठगते हैं जिसके लिए उन्हें फर्जी बैंक खातों की जरूरत होती है। उसी में पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। वह इरफान और उसके दोस्तों के लिए फर्जी बैंक खाते खुलवाता था। उसके द्वारा बेचे गए बैंक खाते में आने वाली ठगी की रकम का 30 परसेंट उसे मिलता था।

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