बहराइच में पकड़े गए भेड़िए, एक को गोरखपुर चिड़ियाघर और अन्य को लखनऊ जू लाया गया
Wolves caught in Bahraich, one brought to Gorakhpur Zoo and others to Lucknow Zoo

गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। पिछले एक सप्ताह से बहराइच और आसपास के 35 गांवों में आतंक और खौफ का पर्याय बन चुके भेड़ियों के झुंड ने लोगों को मौत के घाट उतार दिया, जिनमें 6 बच्चे और 3 महिलाएं शामिल हैं। भेड़ियों के हमले से कई और लोग भी घायल हुए हैं, जो बुरी तरह जख्मी हैं। जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
अशफाक उल्ला खान चिड़ियाघर के चीफ डॉक्टर योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि आदमखोर भेड़ियों के झुंड से चार को स्थानीय वन विभाग की टीम द्वारा रेस्क्यू कर लिया गया है, जिनमें से दो को लखनऊ चिड़ियाघर भेजा गया और एक की मौत हो चुकी है। एक भेड़िया जो उन सभी में सबसे मजबूत और बड़ा है। उसे गुरुवार की देर रात गोरखपुर चिड़ियाघर लाया गया। जहां उसे कोरेंटाइन कर दिया गया है। थोड़ा शांत और सामान्य होने के बाद उसका परीक्षण किया जाएगा कि आखिर किन परिस्थितियों में भेड़िए आदमखोर हुए। डॉ. योगेश के अनुसार फिलहाल वह ठीक है। उसे खाने-पीने की सामग्री दी गई है।
डॉ. योगेश ने आगे बताया कि भेड़िए जंगलों में रहने वाले प्राणी हैं और झुंड में रहते हैं। जहां वह छोटे-मोटे जानवरों का शिकार कर अपना पोषण करते हैं, लेकिन जिस तरह जंगल खत्म होते जा रहे हैं और कटान लगातार जारी है। यही वजह है कि प्रायः जंगली जानवर भटककर रिहायशी इलाकों में या फिर गांव में पहुंच जा रहे हैं। हालांकि, भेड़िए बड़े जानवरों या मनुष्य पर हमलावर नहीं होते। बहराइच मामले में भी भेड़ियों का एक झुंड भटक कर गांव की तरफ चला आया है। जहां उन्हें उनका शिकार नहीं मिल पा रहा और खुद को जंगल से अलग वातावरण में पाकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि वह खुद के बचाव में हमलावर हो रहे हैं।
भेड़ियों ने ज्यादातर छोटे बच्चों को अपना शिकार बनाया है। इस दौरान महिलाएं भी इनका शिकार हुई हैं, क्योंकि बच्चे और महिलाएं पुरुष की अपेक्षा आसानी से उनका शिकार हो सकते हैं। प्रायः भेड़िए आदमखोर नहीं होते हैं। वह विकट या असामान्य स्थितियों में वह ऐसा कर सकते हैं। पूर्व में भेड़ियों द्वारा छोटे बच्चों को अपना शिकार बनाने की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन बहराइच की घटना ने लोगों में खौफ पैदा कर दिया है।




