गाजियाबाद से वीके सिंह का कटा टिकट, अतुल गर्ग गाजियाबाद सीट से भाजपा प्रत्याशी

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। इस क्रम में भाजपा ने गाजियाबाद लोकसभा सीट के उम्मीदवार का नाम भी घोषित कर दिया है। पार्टी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह का टिकट काट दिया है। हालांकि, इस घोषणा से पहले ही वीके सिंह ने चुनावी मैदान से हटने की घोषणा कर दी थी। दरअसल, कई दिनों की कशमकश के बाद आखिरकार बीजेपी ने रविवार रात को गाजियाबाद लोकसभा सीट से उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया। पार्टी ने गाजियाबाद शहर के विधायक अतुल गर्ग को प्रत्याशी घोषित किया है। गर्ग के प्रत्याशी बनाए जाने में प्रदेश संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। उनके पिता दिनेशचंद गर्ग नगर पालिका के पहले चेयरमैन और पहले मेयर भी रह चुके थे।
पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है की अतुल गर्ग 2017 और 2022 में शहरी क्षेत्र से विधायक रहने के साथ ही संघ से जुड़े कई पदाधिकारियों के भी काफी करीब माने जाते हैं। वही प्रदेश संगठन से जुड़े कई पदाधिकारियों के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी से भी उनकी नजदीकियां रहीं हैं। 2017 में चुनाव जीतने के बाद उनकी उनकी तत्कालीन प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल से भी काफी अच्छे संबंध बन गए थे। यही कारण रहा कि वह 2017 के बाद गठित हुई योगी सरकार में मंत्री बने और 5 साल तक मंत्री रहे। इधर बंसल के संगठन मंत्री हटने के कारण 2022 में गठित हुई योगी सरकार में उन्हें मंत्रालय नहीं मिला था।
वहीं, सुनील बंसल के एक बार फिर से राष्ट्रीय टीम में सक्रिय होने की कारण अतुल फिर से मजबूत माने जाने लगे थे। अतुल गर्ग दो बार विधायक रहने के साथ ही काइट समेत कई इंजीनियर कॉलेज के संचालक हैं। इसके अलावा वह रियल स्टेट के कारोबार से भी जुड़े हुए हैं। इनके पिता नगर पालिका के पहले अध्यक्ष और नगर निगम के गठन के बाद पहले मेयर बने थे। गाजियाबाद संसदीय क्षेत्र से एक दशक तक सांसद रहे रिटायर्ड जनरल वीके सिंह ने रविवार देर शाम करीब आठ बजे एक्स पर पोस्ट किया कि वह 2024 का चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके करीब एक घंटे बाद ही नौ बजे पार्टी ने लिस्ट जारी कर गाजियाबाद से अतुल गर्ग को लोकसभा चुनाव में बीजेपी का प्रत्याशी बनाने की घोषणा कर दी।
कमजोर होने के मिले थे संकेत
राजनीति के जानकारों का कहना है कि वीके सिंह ने विधायकों के बारे में कई बार केंद्र व प्रदेश संगठन के नेताओं से शिकायत की थी। यही कारण रहा कि 2017 की योगी सरकार में मंत्री रहे अतुल को 2022 में मंत्री नहीं बनाया गया। जबकि हाल ही में मंत्री मंडल में विस्तार होने पर साहिबाबाद के विधायक सुनील शर्मा को मंत्री बनाने जाने के बाद वीके को संगठन में कमजोर माना जाने लगा था।
पार्टी से जुड़े उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि गाजियाबाद गाजियाबाद से प्रत्याशी की घोषणा न होने से वीके सिंह काफी असहज महसूस कर रहे थे। रविवार को उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से बात भी की। वहीं से उन्हें टिकट न मिलने के संकेत मिल गए थे। इसके बाद ही उन्होंने चुनाव न लड़ने को लेकर पोस्ट किया।
विधायकों और संगठन की नाराजगी पड़ी भारी
पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिस प्रकार से पिछले करीब डेढ़ वर्ष से जिले के विधायकों और स्थानीय संगठन के साथ वीके सिंह की बीच खींचतान चल रही थी। दोनों ही ओर से एक दूसरे पर कई बार आरोप प्रत्यारोप लगाए गए। वहीं प्रदेश संगठन भी विधायकों के साथ ही खड़ा नजर आ रहा था। वीके सिंह की टिकट कटने की यही मुख्य वजह मानी जा रही है। हालांकि पिछले करीब 2 महीने से वीके सिंह क्षेत्र में सक्रिय थे और वह लगातार लोगों से मिलकर यह दावा कर रहे थे कि वही चुनाव लड़ेंगे। रविवार को उन्होंने होली मिलन कार्यक्रम भी रखा था उससे उनके नजदीकी वीके को ही एक बार फिर टिकट मिलना तय मान रहे थे।
बीजेपी के पास रही है गाजियाबाद सीट
2008 में हापुड़ से अलग अस्तित्व में आई गाजियाबाद संसदीय सीट पर लगातार तीन बार बीजेपी का कब्जा रहा है। 2009 में हुए तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। 2014 में राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र लखनऊ से लड़ने की घोषणा के बाद पार्टी ने सेना से रिटायर हुए जनरल वीके सिंह को यहां से टिकट देकर चुनाव में उतार दिया। वीके सिंह 2014 और फिर 2019 में रिकॉर्ड में तो जीते और मोदी सरकार ने मंत्री बनाए गए।




