मध्य प्रदेश के मलाजपुर गांव में लगता है भूतों का मेला,देखने वालों के डर के मारे हो जाते हैं रौंगटे खड़े

बैतूल/मध्य प्रदेश। भूत-प्रेत और चुड़ैल जैसी चीजों को विज्ञान नहीं मानता है लेकिन लोगों की अपनी मान्यताएं हैं। जिन्हें लोग सदियों से निभाते चले आ रहे हैं। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से 42 किमी दूर मलाजपुर गांव में यहां हर साल भूतों का मेला लगता है। यह मेला मकर संक्रांति की पहली पूर्णिमा से शुरू होता है और बसंत पंचमी तक चलता है। इस मेले में शामिल होने के लिए आसपास के कई राज्य जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश से कई लोग पहुंचते हैं।
मलाजपुर गांव के देवजी महाराज मंदिर में लगने वाले भूतों के मेले में बुरी आत्माओं, भूत-प्रेत और चुड़ैल से प्रभावित लोग एक पेड़ की परिक्रमा करते हैं और अपनी बाधाएं दूर करते हैं। जिन पर भूत-प्रेत का साया होता है वह लोग कपूर जलाकर अपने हाथ और मुंह में रख लेते हैं।
बसंत पंचमी तक चलने वाले भूत मेले में शाम की पूजा के बाद लोग मंदिर की परिक्रमा करते हैं। माना जाता है कि जिसे कोई समस्या नहीं होती है, वह सीधी दिशा में परिक्रमा करते हैं। जो भूत-प्रेत से प्रभावित होते हैं वह विपरीत दिशा में चलते हैं।
भूत-प्रेत से प्रभावित लोग जब ठीक हो जाते हैं, तब उन्हें यहां गुड़ से तौला जाता है। यहां हर साल कई किलो गुड़ इकट्ठा हो जाता है, जिसे प्रसाद के तौर पर बांट दिया जाता है। अब इसे चमत्कार कहें या कुछ और लेकिन यहां काफी मात्रा में गुड़ जमा होने के बाद भी उस पर कीड़े, मक्खियां या चीटियां नहीं लगती हैं जो हैरत की बाता है। लोक अस्था है कि यह बाबा का चमत्कार है।
मान्यता है कि 1770 में गुरु साहब बाबा नाम के साधु थे। उनके पास चमत्कारिक शक्तियां थीं, वह भूत-प्रेतों को वश में कर लेते थे। गांव के सभी लोग उन्हें भगवान का स्वरूप मानते थे। उन्होंने वृक्ष के नीचे जिंदा समाधी ले ली। गुरु साहब ने जहां समाधी ली थी, वहां गांव वालों ने मंदिर बनवा दिया।




