इंटरव्यू में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर पूछा सवाल, ऐसा जवाब दिया कि पीसीएस में हुआ सेलेक्शन
सुल्तानपुर/उत्तर प्रदेश। सुल्तानपुर के लम्भुआ तहसील के बधुपुर गांव के रहने वाले सदानंद सिंह ने 2 जनवरी को अपने पिता को मुखाग्नि देने के बाद 10वें दिन पीसीएस का इंटरव्यू दिया। पीसीएस के इंटरव्यू के दौरान राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर पूछे गए सवाल का सही जवाब देने पर उन्हें डिप्टी जेलर का पद मिल गया है। मंगलवार को जब पीसीएस के रिजल्ट आउट हुए तो उन्हें यह कामयाबी हासिल हुई। वहीं बेटे की इस उपलब्धि की खबर सुनकर विधवा मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। सदानंद की बहन जो कि बहन प्राइमरी में टीचर है, भाई को मिली इस जिम्मेदारी पर उनका भी खुशी का ठिकाना नहीं है।
सदानंद से इंटरव्यू के दौरान सवाल हुआ कि राम भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं? इस पर सदानंद ने जवाब दिया कि भगवान प्रभु राम का जीवन दर्शन ही दर्पण की तरह है। बता दें कि सदानंद ने साल 2009 में हाईस्कूल और 2011 में इंटरमीडिएट की परीक्षा स्वामी विवेकानंद विद्या आश्रय प्रयागराज से पास किया। मैट्रिक में उसे 77 प्रतिशत तो इंटर में 78 प्रतिशत अंक मिले। पांच वर्ष बाद 2016 में केएनआईपीएसएस सुल्तानपुर से उसने इंजीनियरिंग की परीक्षा पास किया। फिर उन्होंने परिवार की ही फर्म पर काम शुरू कर दिया। हालांकि ऑफिसर बनने का सपना था तो प्रयागराज में ही कमरे पर तैयारी शुरू कर दी। बगैर किसी कोचिंग के वो नोट्स बनाते थे। मार्केट से किताबें लाए। मोबाइल पर इंटरनेट से मटेरियल सर्च किया। रोज आठ घंटे पढ़ाई थी। पीसीएस परीक्षा के पहले प्रयास में मेंस तक पहुंचे थे। वहीं दूसरे प्रयास में मेंस से आगे बढ़े और 11 जनवरी को इंटरव्यू दिया था।
2 जनवरी को पिता का हुआ निधन
इसी बीच भाग्य ने ऐसी पलटी खाई कि उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। इंटरव्यू से ठीक दस दिन पहले 2 जनवरी को पिता ने सदा के लिए आंख बंद कर ली। सदानंद को लगा सपने टूट जाएंगे, लेकिन संयुक्त परिवार में बड़े पिता से लेकर चाचा और फिर मां-बहने सबने हौसला बढ़ाया। आखिर उन्होंने इंटरव्यू दिया। मंगलवार को जब रिजल्ट आया तो उसकी आंखों से खुशी और गम दोनों के आंसू एक साथ बहें। हालांकि उन्हें पिता को ये उपलब्धि न दिखा पाने का मलाल था।
बड़ी बहन प्राइमरी टीचर
सदानंद दो भाई और दो बहन हैं। छोटे भाई ने ग्रेजुएशन कंप्लीट किया है। दो बहनों में बड़ी प्राइमरी टीचर और छोटी बहन सोशल वर्कर की तैयारी कर रही है। मां रेखा सिंह गृहणी हैं। सदानंद के बड़े पिता वीरेंद्र प्रताप सिंह इंटर कॉलेज के रिटायर्ड टीचर हैं। पिता महेंद्र सिंह बिजनेसमैंन थे। ऐसे में अब वो रहे नहीं तो परिवार की जिम्मेदारी उसके कांधों पर आ गई है। सदानंद कहते हैं कि सभी के लिए बस एक संदेश है, ईमानदारी मेहनत का रास्ता पकड़ें, यही सफलता की सबसे बड़ी पूंजी है।




