कचहरी के चक्कर काटते हुईं परेशान, फिर भारतीय मूल की महिला ने अमेरिका में जज बनकर रचा इतिहास

नेशनल डेस्क। अमेरिकी राज्य टेक्सस में स्थित 240वें न्यायिक जिले (फोर्ट बेंड काउंटी) में तीन भारतवंशी जज चुने गए हैं। प्रतिव्यक्ति आय और पारिवारिक आय के लिहाज से यह अमेरिका का सबसे अमीर इलाका है। यहां प्रतिव्यक्ति औसत सालाना आाय 95,389 डॉलर है, जबकि औसत पारिवारिक आय 105,944 डॉलर है। यहां रविवार को भारतीय मूल की जूली ए मैथ्यू, केपी जॉर्ज और सुरेंद्रन के पटेल ने जज के तौर पर शपथ ली। जूली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं, जो जज चुनी गईं। उन्होंने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी को हराकर दूसरी बार काउंटी जज का चुनाव जीता है। जूली ए मैथ्यू ने अमेरिका में 15 साल तक एक वकील के रूप में काम किया और 4 साल पहले वह वहां न्यायाधीशों की एक पीठ के लिए चुनी गईं।

जूली ए मैथ्यू के पिता व्यवसाय करते थे जिसमें उनको कई बार कानूनी रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ा, इसके बाद जूली ने कानून की पढ़ाई करने के बारे में सोचा। जूली मैथ्यू ने अमेरिका में 15 वर्षों तक एक वकील के रूप में सेवा की और चार साल पहले वहां जज की बेंच के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला बनकर इतिहास रच दिया।वहीं अमेरिका के टेक्सास में फोर्ट बेंड काउंटी जज के रूप में लगातार दूसरी बार शपथ लेने वाली वह पहली अमेरिकी भारतीय हैं। हालांकि अब उन्हें लगता है कि यह उनके लिए अब तक की सबसे अच्छी नौकरी है और उन्हें यह पेशा सबसे ज्यादा पसंद है। मैथ्यू ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से टेक्सास में काउंटी अदालत के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
दरअसल, जूली ए मैथ्यू अभी केरल के कासरगोड जिले में अपने पति के गांव भीमनाडी के घर (ससुराल) में हैं। उन्होंने पीटीआई को बताया कि इस बार मेरी इच्छा अपने पति के घर से शपथ लेने की थी। अन्यथा मेरे ससुराल वाले समारोह में भाग नहीं ले पाते। मुझे बहुत खुशी है कि वे और परिवार के अन्य सदस्य शपथ ग्रहण के साक्षी बन सके। जूली मैथ्यू ने कहा कि चार साल पहले जब वह पहली बार जज बनीं तो उनके माता-पिता समारोह देखने और उन्हें आशीर्वाद देने के लिए वहां मौजूद थे। वह मेरे लिए बहुत अच्छी यादें हैं। इस बार उनके माता-पिता और बड़ी बेटी समारोह में हिस्सा नहीं ले सके क्योंकि वे अमेरिका में थे। उन्होंने बताया कि मेरे माता-पिता ने कानूनी अध्ययन करने से हतोत्साहित किया।




